गुर्जरों का आंदोलन जारी, स्थिति तनावपूर्ण

गुर्जर समुदाय शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में बेहतर अवसर प्राप्त के लिए अनुसूचित जनजाति का दर्जा प्राप्त करना चाहता है। राज्य में हिंसक आंदोलनों में अभी तक 37 लोगों की मौत हो चुकी है।
सूत्रों के अनुसार सरकार गुर्जर नेताओं के साथ बातचीत करना चाहती है। एक सूत्र ने कहा, "राज्य सरकार उद्योग मंत्री दिगम्बर सिंह के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल को गुर्जर नेताओं के साथ वार्ता के लिए भेजने की योजना बना रही है।"
राज्य के कुछ शहरों में गुर्जरों द्वारा बंद की घोषणा के बाद सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की है। 'गुर्जर संघर्ष आरक्षण समिति' के प्रमुख के. एस. बैंसला और उनके समर्थक पुलिस फायरिंग में मारे गए कुछ शवों को लेकर बयाना शहर के समीप स्थित रेलवे पटरी पर बैठे हुए हैं।
बयाना में प्रदर्शनकारियों पर सेना नजर रखे हुए है। सूत्रों के अनुसार प्रदर्शनकारियों की खाद्य आपूर्ति रोक दी गई है। भरतपुर, दौसा, सवाई माधोपुर और करौली जिले में सेना और अर्धसैनिक बल के जवान लगातार गश्ती लगा रहे हैं।
गौरतलब है कि शुक्रवार को बयाना में हिंसा में एक पुलिसकर्मी समेत 17 लोगों की मौत हुई थी। राज्य के गृह सचिव वी. एस. सिंह ने कहा, "हमारी जानकारी के अनुसार बयाना में शुक्रवार को आठ लोग और सिंकदरा में शनिवार को 14 की मौत हुई थी।"
मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने भी रविवार को गुर्जर नेताओं को चेतावनी देते हुए कहा, "आप मेरे धैर्य की परीक्षा नहीं लें। कानून को हाथ में लेने वाले लोगों को नहीं बख्शा जाएगा।' गौरतलब है कि राज्य में पिछले साल 29 मई और चार जून के बीच भी गुर्जरों का आंदोलन भड़का था। इन आंदोलन में कम से कम 26 लोग मारे गए थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस


Click it and Unblock the Notifications