तेल कीमत वृद्धि पर वामदल ख़फा

सूत्रों के अनुसार कीमतों में वृद्धि को लेकर वामदलों के भारी विरोध को देखते हुए सरकार को इस मामले में पीछे हटना पड़ा है। तेल की कीमतों में वृद्धि को लेकर प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में उनके आवास पर शुक्रवार को आयोजित बैठक में प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव टी.के.ए. नायर, पेट्रोलियम सचिव एम.एस.श्रीनिवासन व वित्त सचिव डी. सुब्बाराव ने भी भाग लिया। बैठक के बाद संवादाताओं से बातचीत में श्रीनिवासन ने कहा कि अगले 3 से 4 दिनों में इस मामले में निर्णय ले लिया जाएगा।
इससे पहले तेल कंपनियों के प्रतिनिधियों से मिलने के बाद संवादाताओं से बातचीत में देवड़ा ने शुक्रवार को कहा कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तेल की बढ़ती कीमतों के मद्देनजर तेल कंपनियों को लगातार हो रहे घाटे से राहत प्रदान करने के लिए पेट्रोल, गसोलिन व डीजल की कीमतों में वृद्धि तय है लेकिन सरकार से अंतिम मंजूरी मिलने में तकरीबन एक सप्ताह की देर हो सकती है।
देवड़ा के मुताबिक तेल कंपनियों को राहत प्रदान करने के लिए उनके मंत्रालय ने केंद्रीय मंत्रिमंडल को एक प्रस्ताव सौंपा है, जिसमें पेट्रोल, डीजल व गैसोलिन की खुदरा कीमतों में वृद्धि के साथ -साथ आयात व उत्पाद कर में भी कटौती की मांग की गई है। सूत्रों के अनुसार पेट्रोल की कीमतों में 10 रुपये प्रति लीटर व डीजल की कीमतों में 5 रुपये प्रति लीटर वृद्धि का प्रस्ताव है।
मुरली देवड़ा के अनुसार पेट्रोल व डीजल पर फिलहाल राशनिंग का कोई प्रस्ताव सरकार के पास नहीं है। तेल व प्राकृतिक गैस मंत्रालय सरकार से तेल कंपनियों के लिए ज्यादा बांड जारी करने की भी वकालत कर रही है। साथ ही आयात कर को 7.5 फीसदी से घटाकर 2.5 फीसदी तक करने की भी सिफारिश की गई है।
तेल व प्राकृतिक गैस मंत्रालय में सचिव श्रीनिवासन के अनुसार सरकार तेल कंपनियों के लिए क्रेडिट लिमिट बढ़ाने पर विचार भी कर सकती है। लंदन स्थित आईसीई वायदा में गुरुवार को ब्रेंट क्रूड का जुलाई वायदा 135.14 डालर प्रति बैरल की नई ऊंचाई पर दर्ज किया गया। न्यूयार्क मर्के टाइल एक्सचेंज यानी नाइमेक्स के इलेक्ट्रानिक कारोबार में भी तेल का जुलाई वायदा 135.09 डालर प्रति बैरल के उच्चतम स्तर तक पहुंच गया।
सरकार ने इससे पूर्व फरवरी में 20 महीनों के बाद गैसोलिन व डीजल की खुदरा कीमतों में वृद्धि की घोषणा की थी। उधर सरकार के सहयोगी वामदल तेल व गैस मंत्रालय के प्रस्ताव का कड़ा विरोध कर रहे हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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