खाद्य संकट को विकसित देश जिम्मेदारः भारत

संयुक्त राष्ट्र की आर्थिक और सामाजिक परिषद द्वारा 'विश्व खाद्य संकट' विषय पर आयोजित विशेष बैठक में संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत निरुपम सेन ने बुधवार को कहा कि विकासशील देशों में उपभोग का स्तर एक दशक से बढ़ रहा है, पिछले एक वर्ष के दौरान बढ़ने वाली कीमतों को इससे नहीं जोड़ा जा सकता है।
सेन ने कहा कि खाद्यान्नों की कम कीमत और तेल के ऊंचे दामों ने ईंधन बनाने में अनाज के उपयोग को बढ़ाया है। मौसम में बदलाव ने खाद्य संकट को और भी बढ़ा दिया है। सेन ने कहा कि कई विकसित देशों में जमीन का उपयोग खाद्यान्नों की बजाए बायोडीजल के उत्पादन के लिए फसल बोया जा रहा है।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बयान को दोहराते हुए सेन ने कहा कि तेल की कीमतों और खाद्यान्नों की कीमतों में सीधा संबंध है। संयुक्त राष्ट्र में भारतीय राजदूत ने यह भी कहा कि अमेरिका में वित्तीय संकट ने भी दुनिया भर में खाद्यान्न की कीमतों को बढ़ाने में योगदान दिया है।
सेन ने अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक द्वारा विकासशील देशों से कृषि क्षेत्र में सहायता घटाने के दबाव डालने की नीति को भी खाद्यान्न संकट के लिए जिम्मेदार बताया।
उन्होंने अफ्रीकी देश मलावी का उदाहरण दिया जहां उवर्रकों और बीजों पर सहायता पिछले वर्ष पुन: शुरू की गई इससे देश खाद्यान्नों के मामले में आत्मनिर्भर हो गया है और निर्यात भी कर रहा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस


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