चुनावी समर में होंगे दोनों गांधी सुपुत्र

अमेठी और रायबरेली ही नहीं, अब पीलीभीत और आंवला भी दो ऐसी सीटें होंगी जहां से मां-बेटे भाग्य आजमाएंगे। दिलचस्प बात यह भी है कि राहुल गांधी की अमेठी और सोनिया गांधी की रायबरेली की तरह पीलीभीत और आंवला भी एक दूसरे से सटी हुई सीटें हैं।
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने आईएएनएस को बताया कि लोकसभा चुनाव के संबंध में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र प्रचारक अशोक बेरी द्वारा शुक्रवार को भाजपा नेताओं के साथ हुई बैठक में इस निर्णय की औपचारिक जानकारी दी गई।
पांच बार पीलीभीत लोकसभा सभा सीट से जीत चुकी मेनका गांधी ने यह सीट अपने बेटे वरुण के लिए छोड़ दी है और वह स्वयं बगल की आंवला सीट से चुनाव लड़ेंगी। इसके लिए मेनका गांधी ने स्वयं जनता दल (यू) के अध्यक्ष शरद यादव से बात की है।
दरअसल आंवला सीट गत लोकसभा चुनाव में भाजपा ने सहयोगी जद (यू) के लिए छोड़ दी थी और यहां से उसके उम्मीदवार कुंवर सर्वराज सिंह विजयी हुए थे। मुलायम सिंह शासन के आखिरी महीनों में जब वी. पी. सिंह और राज बब्बर ने मुलायम सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा था, तब सर्वराज सिंह भी उनके साथ आ गए थे। बाद में सूबे में सत्ता परिवर्तन हो गया लेकिन राजनीतिक तौर पर यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि सर्वराज सिंह अब किस दल के साथ हैं।
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि मेनका गांधी ने स्वयं शरद यादव से बात की और जद (यू) अध्यक्ष ने उनके आंवला से लड़ने पर अपनी अनापत्ति दे दी। भाजपा ने कहा कि मेनका ने वरुण के चुनावी राजनीति के प्रवेश को अपेक्षाकृत आसान बनाने के लिए स्वयं नई सीट पर जाने का निर्णय किया है।
उल्लेखनीय है कि मेनका गांधी ने पहली बार 1989 में जनता दल उम्मीदवार के तौर पर पीलीभीत सीट जीती थी लेकिन 1991 में तब उनके पैर उखड़ गए, जब राम लहर पर सवार भाजपा के परशुराम गंगवार ने उन्हें हरा दिया। उसके बाद से मेनका पीलीभीत से लगातार चार लोकसभा चुनाव जीत चुकी हैं और अब उन्हें अपने बेटे से जीत का सिलसिला बनाए रखने की उम्मीद है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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