संघीय जांच एजेंसी के मुद्दे पर भाजपा ने उठाए सवाल

भाजपा महासचिव अरुण जेटली ने संवाददताओं से कहा कि सत्ता में चार साल बने रहने के बाद प्रधानमंत्री ने अब जाकर आतंकवाद के कड़वे सच को स्वीकारा है। प्रधानमंत्री और उनकी सरकार ने हमेशा ही आतंकवाद के खिलाफ कड़े कानून बनाए जाने का विरोध किया है। ऐसे में संघीय जांच एजेंसी बना देना ही काफी नहीं है जब तक कि सरकार आतंकवाद के खिलाफ कोई कड़ा कानून नहीं लाती है।
जेटली ने यह कहते हुए प्रधानमंत्री पर निशाना साधा कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार का आतंकवाद के प्रति ट्रैक रिकार्ड बहुत ही खराब रहा है। पहले तो सरकार ने पोटा हटाया और अब राजस्थान, मध्यप्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों में महाराष्ट्र के मकोका की तर्ज पर कानून बनाए जाने संबंधी प्रस्तावों को हरी झंडी नहीं दे रही है। ऐसे में प्रधानमंत्री द्वारा अचानक संघीय एजेंसी बनाए जाने की बात करना बेमानी है।
उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि जिस सरकार ने केंद्रीय जांच ब्यूरो का राजनीतिकरण करके रख दिया हो और उसे अपने राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल करती रही हो, उस पर कैसे विश्वास किया जा सकता है कि उसके अधीन गठित संघीय जांच एजेंसी स्वतंत्र व निष्पक्ष रहेगी।
उन्होंने प्रधानमंत्री पर आरोप लगाया कि आतंकवाद के प्रति उनकी सरकार ने हमेशा नरम रुख अख्तियार किया क्योंकि उसके लिए वोट बैंक की चिंता सवरेपरि रही।
जेटली ने कहा कि भाजपा इस बात पर बहस करने को तैयार है कि बिना किसी प्रभावी कानून के संघीय जांच एजेंसी की स्थापना करने का कोई मतलब नहीं होता है। उन्होंने प्रधानमंत्री से सवाल किया कि उनके पास इतनी राजनीतिक हिम्मत है कि आतंकवाद के खिलाफ जंग में वह कोई कड़ा कानून बनाएं। ऐसी परिस्थिति में क्या संप्रग के सहयोगी और वामदल उनका समर्थन करेंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


Click it and Unblock the Notifications