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70 लाख बच्चों में आयोडीन की कमी

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Mike Pandey
नई दिल्ली, 15 मई: भारत की आजादी के साठ वर्ष हो गए हैं। इसके बावजूद यहां की 67 प्रतिशत आबादी पर्यावरण और वन्यजीव के संबंध में कोई खास जानकारी नहीं रखती है। विश्व के जानेमाने लघु फिल्म निर्माता और पर्यावरणविद माइक पांडे ने यह बात कही।

ग्रीन आस्कर विजेता माइक पांडे ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "आज स्थितियां ऐसी पैदा हो गई हैं कि देश के विभिन्न हिस्सों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता अभियान चलाना बेहद जरूरी हो गया है। पूरे देश में 70 लाख से अधिक बच्चे आयोडीन की कमी से पैदा होने वाली बीमारी से ग्रस्त हैं। देश के अधिकांश इलाके में यह समस्या देखी जा सकती है।"

उन्होंने याद दिलाते हुए कहा कि सरकार ने आयोडीन युक्त नमक के इस्तेमाल को जरूरी कर दिया है लेकिन देश के दूरदराज वाले कई इलाकों में साधारण नमक का अभी भी धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है।

अपने अनुभवों को बांटते हुए उन्होंने कहा कि हाल ही में उत्तर प्रदेश के पड़होना गांव जाने का मौका मिला। इस दौरान पता चला कि एक ही परिवार के 17 बच्चे आयोडीन की कमी के शिकार हैं और पीड़ित परिवार को अब तक किसी तरह की चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई है।

पांडे का मानना है कि पर्यावरण को फिलहाल जल, वायु और वन्यजीव संकट से जूझना पड़ रहा है। इसमें जल संकट देश के लिए सबसे गंभीर समस्या बनती जा रही है। यहां कई हिस्सों में भूजल जल स्तर गिरता जा रहा है और जल की उपलब्धता कम होती जा रही है।

कई जगह जल हैं लेकिन उसमें विभिन्न रासायनिक व घातक तत्व पाए जा रहे हैं। उर्वरकों व कीटनाशकों के अंधाधुंध इस्तेमाल ने जल प्रणाली को काफी गहरे स्तर पर प्रदूषित किया है।

यमुना नदी का उदाहरण देते हुए पांडे ने कहा, "इस नदी के जल की अम्लता में तीन लाख फीसदी का इजाफा हुआ है जबकि पारा और सीसा के स्तर में पांच लाख गुणा वृद्धि हुई है। इसकी वजह से ही अल्जाइमर नामक रोग प्रचलन में आया है।"

उन्होंने कहा कि आज की स्थिति में समुद्र मंथन के द्वारा अमृत निकालने की नहीं बल्कि जल निकालने की जरूरत है। प्रदूषित जल, तापमान में वृद्धि और जलवायु परिवर्तन का कुल मिलाकर मिट्टी और हवा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। जलवायु परिवर्तन के कारण ही किसानों को फसल चक्र में परिवर्तन के लिए भी मजबूर होना पड़ रहा है।

हिमालय के तराई क्षेत्रों में सेब उगाने वाले किसान पहाड़ के निचले इलाकों की बजाय ऊपरी क्षेत्र में सेब की खेती कर रहे हैं। माइक पांडे ने लोगों को सावधान करते हुए कहा कि अगर मौजूदा स्थिति कायम रही तो वन्यजीव की सारी प्रजाति लुप्त हो जाएगी। हमें एक पक्षी भी नजर नहीं आएगी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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