माओवादियों के राजा पर मनोवैज्ञानिक हमले तेज हुए

काठमांडू , 14 मई (आईएएनएस)। नेपाल में माओवादियों ने राजा ज्ञानेंद्र पर महल छोड़ने के लिए के मनोवैज्ञानिक प्रहार भले ही तेज कर दिया है, लेकिन राजा ने अपने पुराने आवास 'निर्मल निवास' की मरम्मत के बाद भी महल छोड़ने के बारे में चुप्पी साध रखी है।

गौरतलब है कि माओवादियों ने राजा को 28 मई तक नारायणहिती महल छोड़ने की मोहलत दी है। इसी दिन प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला ने नवनिर्वाचित संविधान सभा की पहली बैठक बुलाई है, जब नेपाल को औपचारिक रूप से गणतंत्र घोषित किया जाएगा।

पिछले एक हफ्ते में आधा दर्जन माओवादी नेताओं ने बयान देकर राजा से अंतिम दिन का इंतजार किए बिना महल छोड़ने का आग्रह किया है। उन्होंने राजा को चेतावनी दी की यदि 28 मई तक उन्होंने महल नहीं छोड़ा तो जनता उनको महल से फेंक देगी या फिर राष्ट्रीय संपत्ति पर अवैधानिक रूप से कब्जा करने के आरोप में सुरक्षा बल उनको महल से बाहर कर देंगे।

माओवादियों के शीर्ष नेता प्रचंड ने चाय बागानों के लिए मशहूर पूर्वी नेपाल के जिले ईलाम में एक जनसभा में कहा कि उनकी पार्टी ने राजा के पास एक पत्र भेजा है। पत्र में उनके महल छोड़ने के फायदों और नुकसानों का वर्णन है।

समाचारों के अनुसार राजा के विश्ववासपात्र पूर्व मंत्री कमल थापा ने प्रचंड से आग्रह किया था कि राजशाही को प्रतीकात्मक रूप से बने रहने दिया जाए लेकिन प्रचंड ने उनकी मांग को अस्वीकार कर दिया।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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