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आंतरिक सुरक्षा पर मुख्यमंत्रियों की शीघ्र बैठक बुलाए केंद्र : मोदी

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    गांधीनगर, 14 मई (आईएएनएस)। जयपुर में मंगलवार को हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के मद्देनजर गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों की एक बैठक तत्काल बुलाने की मांग की है।

    जयपुर की घटना पर मोदी ने जहां दुख जताया वहीं केंद्र सरकार के रवैये के प्रति अपनी नाराजगी भी जाहिर की। प्रधानमंत्री को लिखे अपने पत्र में मोदी ने मनमोहन सिंह को आंतरिक सुरक्षा के मुद्दे पर जमकर खरी-खरी सुनाई।

    उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) या राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) शासित किसी राज्य में आतंकवादी घटनाएं होती हैं तो कांग्रेस नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) अपनी चिंता जताने की बजाए अलग ही राग अलापने लगती है। जबकि संप्रग या कांग्रेस शासित राज्यों में जब इस प्रकार की घटनाएं होती है तो वह गंभीरता से अपनी चिंता प्रकट करती है।

    उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार आतंकवादी घटनाओं पर सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी करती रही है। जयपुर में हुए बम धमाकों के बाद भी केंद्र सरकार के किसी मंत्री ने कठोर बयान नहीं दिया बल्कि राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया। आतंकवाद के प्रति केंद्र सरकार की यह नरमी देश की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा है।

    उन्होंने कहा है कि जयपुर बम धमाकों ने केंद्र सरकार के उन सभी दावों की पोल खोल दी है जिसमें वह बार-बार कहती है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को लेकर वह बहुत गंभीर है। उन्होंने कहा कि आतंकवादी हमलों के संबंध में केंद्र सरकार की चेतावनी मौसम के पूर्वानुमानों की तरह होती है। इसमें स्पष्टता का सर्वथा अभाव रहता है।

    उन्होंने कहा कि केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां नियमित तौर पर चेतावनी संदेश भेजा करती हैं और ऐसा करके वह अपनी जिम्मेदारियों से संतुष्ट हो जाती हैं। यदि उनकी चेतावनी प्रभावी और विशुद्ध हो तो पहले से ही सुरक्षा संबंधी इंतजामात किए जा सकते हैं।

    उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में केंद्र सरकार के पास राजनीतिक इच्छाशक्ति का अभाव बताया और पोटा कानून हटाए जाने की आलोचना की। उन्होंने कहा कि राजस्थान और गुजरात की सरकारों ने संगठित अपराधों के लिए महाराष्ट्र की मकोका की तर्ज पर राजकोका और गुजकोका कानून अपनी-अपनी विधानसभाओं से पारित कराया है लेकिन केंद्र सरकार ने इसे अभी तक हरी झंडी नहीं दी है।

    इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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