संसद हमलाः शौकत की सजा बरकरार

Parliament of India
नई दिल्ली, 14 मईः सर्वोच्च न्यायालय ने आज संसद पर हमले के दोषी शौकत हुसैन गुरु की चौथी अपील को खारिज कर दिया जिसमें उसने अपनी दस वर्ष की सजा को चुनौती दी थी। तेरह दिसंबर 2001 को संसद पर हुए हमले मामले में तथ्य छिपाने के दोषी शौकत को दस साल के कारावास की सजा दी गई है।

न्यायमूर्ति पी.पी.नावलेकर और न्यायमूर्ति वी.एस. श्रीपुरकर ने जैश-ए-मुहम्मद के इस कथित सदस्य की अपील को खारिज कर दिया। गुरु इस समय दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है। उसने अगस्त में न्यायालय में अपील दाखिल कर कहा था कि उसे गलत सजा सुनाई गई है। शौकत का कहना था कि उसपर पुलिस से जानकारी छिपाने का जो आरोप लगाया गया है वह ट्रायल कोर्ट में उस पर नहीं लगाया गया था।

खंडपीठ ने 22 अप्रैल को दिल्ली सरकार के वकील और अतिरिक्त महाधिवक्ता गोपाल सुब्रमण्यम और शौकत गुरु के वकील पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री शांतिभूषण की दलीलें सुनने के बाद अपील पर अपना फैसला सुरक्षित रखा था। प्रारंभ में शौकत पर निरस्त किए जा चुके पोटा (प्रीवेंशन आफ टेररिस्ट एक्टिविटीज) अधिनियम सहित कई अन्य धाराओं के तहत देशद्रोह का मामला चलाया गया था।

ट्रायल कोर्ट ने उसे फांसी की सजा सुनाई, जिसे दिल्ली उच्च न्यायालय ने बरकरार रखा था। सर्वोच्च न्यायालय ने उसकी सजा कम करके दस वर्ष कर दी। न्यायालय ने उस पर पूर्व में लगे आरोपों को हटाते हुए संसद पर हमले की जानकारी छिपाने के दोष में यह सजा सुनाई।

गुरु ने इससे पहले उच्चतम न्यायालय के समक्ष मृत्युदंड और दो बार नए आरोपों के विरुद्ध अपील की थी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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