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दो माह की अनाथ एचआईवी ग्रसित बच्ची को अस्पताल से बाहर निकाला

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    रायपुर, 13 मई (आईएएनएस)। एक तो दो माह की अनाथ बच्ची और ऊपर से एचआईवी से ग्रसित। इतना ही नहीं राज्य के अंबिकापुर के सरकारी अस्पताल द्वारा इसे बाहर का रास्ता दिखाना और यह कहना कि बच्ची के कारण अन्य मरीज संक्रमित हो सकते हैं। एड्स पीड़ितों के साथ भेदभाव नहीं होने देने के तमाम सरकारी दावों की पोल खोलता है।

    रायपुर, 13 मई (आईएएनएस)। एक तो दो माह की अनाथ बच्ची और ऊपर से एचआईवी से ग्रसित। इतना ही नहीं राज्य के अंबिकापुर के सरकारी अस्पताल द्वारा इसे बाहर का रास्ता दिखाना और यह कहना कि बच्ची के कारण अन्य मरीज संक्रमित हो सकते हैं। एड्स पीड़ितों के साथ भेदभाव नहीं होने देने के तमाम सरकारी दावों की पोल खोलता है।

    दरअसल, यह शर्मनाक घटना पिछले दिनों छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले की है। जिला मुख्यालय अंबिकापुर के सरकारी अस्पताल ने एक अनाथ एचआईवी पीड़ित दो माह की बच्ची को बाहर निकाल दिया और कहा कि वह अन्य मरीजों को संक्रमित कर सकती है। अस्पताल ने बच्ची को एक अनाथालय के हवाले कर दिया।

    दो महीने की यह बच्ची 10 मार्च को रायपुर से 450 किलोमीटर दूर सरगुजा जिले के बलरामपुर इलाके के एक जंगल में लावारिस पड़ी मिली थी।

    स्थानीय जनजातीय समुदाय के लोग बच्ची को तुरंत अंबिकापुर के जिला अस्पताल ले गए। अस्पताल में बच्ची का एचआईवी टेस्ट किया गया, जिसमें बच्ची के एचआईवी पीड़ित होने की पुष्टि हो गई। अस्पताल ने बच्ची को दो मई तक अपने पास रखा और फिर गोपनीय तरीके से उसे गुरुकुल आश्रम को सौंप दिया।

    अस्पताल की इस हरकत ने उन सरकारी दावों की कलई खोल दी है जिनमें कहा जाता है कि सरकार एड्स पीड़ितों के खिलाफ भेदभाव से लड़ने की हर कोशिश कर रही है।

    आईएएनएस के पास अंबिकापुर के उपजिलाधिकारी (एसडीएम) चंदन त्रिपाठी द्वारा दो मई को हस्ताक्षरित एक पत्र है जिसमें कहा गया है "बच्ची को समुदायिक सेवा केंद्र के हवाले किया जा रहा है क्योंकि उससे अन्य मरीजों को संक्रमण का खतरा है।"

    पत्र के अनुसार "अगर हम बच्ची को अस्पताल में रखते हैं तो इससे दूसरे मरीजों के भी एड्स से पीड़ित होने का खतरा पैदा हो जाएगा।"

    इस बारे में पूछे जाने पर जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी अमर सिंह ठाकुर ने बताया, "मुझे उस एड्स पीड़ित बच्ची के अस्पताल में दाखिले के बारे में पूरी जानकारी है लेकिन बच्ची को किन परिस्थितियों में सेवा केंद्र को सौंपा गया इसके बारे में सिविल सर्जन ही जानकारी दे पाएंगे।"

    सिविल सर्जन पी.के.श्रीवास्तव ने भी सवाल से कन्नी काटते हुए कहा, "आदेश पत्र अस्पताल द्वारा तैयार किया गया और इस पर एसडीएम के हस्ताक्षर हैं मैं इसका दुबारा अध्ययन करूंगा।"

    संवेदनहीन व्यवस्था द्वारा ठुकराई गई इस बच्ची का गुरुकुल आश्रम ने दिल खोल कर स्वागत किया। इस आश्रम में 60 अनाथ बच्चे रहते हैं जिनमें से सात एचआईवी पीड़ित हैं। यहां 23 बच्चे ऐसे हैं जिनके मां बाप नक्सली हिंसा में मारे गए हैं।

    आश्रम के संस्थापक नारायण राव ने बताया कि यह बच्ची उनके आश्रम की सबसे छोटी सदस्य है और उसे यहां पूरी जिम्मेदारी से पाला जाएगा।

    इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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