बुंदेलखंड में मौत से अधिक पानी की चिंता

Bundelkhand Water
भोपाल, 12 मई: बुंदेलखंड में पानी की कमी ने सामाजिक रिश्तों के ताने बाने पर जबर्दस्त प्रभाव डाला है। लोगों को मौत के दुख के बीच जल संकट की चिंता भी सताने लगी है। हालत यह है कि लोग नहीं चाहते कि मौत पर दुख जताने के लिए परदेश में बसे उनके रिश्तेदार गांव आएं।

पिछले पांच सालों से सूखे की मार झेल रहे बुंदेलखंड की तस्वीर साल दर साल बदतर होती जा रही है। पिछले दो वर्षो से पूरा बुंदेलखंड वीरान हो गया है। नदियां, तालाब, कुएं और हैंडपंप लगभग पूरी तरह सूख चुके हैं।

बुंदेलखंड का एक बड़ा इलाका ऐसा है जहां पानी के ज्यादा स्रोत नहीं हैं। ऐसा ही एक इलाका है छतरपुर जिले का बिजावर तहसील। यहां लोगों को नियमित तौर पर पानी नहीं मिल रहा है। उनके लिए पानी का इंतजाम करना किसी जंग से कम नहीं है।

पानी की कमी के कारण शादी समारोह तक नहीं हो पा रहे हैं। बिजावर के मोहन गंज में रहने वाले उमेश खरे की मां दुर्गा देवी की 3 मई को मृत्यु हो गई। रिश्तेदारों ने खबर मिलते ही बिजावर जाने की इच्छा जताई। लेकिन पानी की कमी से जूझ रहे उमेश ने अपने रिश्तेदारों को यह कहकर आने से मना किया कि वहां पानी का संकट है।

उमेश का कहना है कि पानी के संकट ने उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर किया है। एक साथ बड़ी तादाद में रिश्तेदार आ जाएंगे तो वह उनके लिए पानी का इंतजाम कैसे करेंगे। वे अपनी मां के निधन से बेहद दुखी हैं लेकिन उन्हें रिश्तेदारों के आने से होने वाली समस्या की चिंता भी कम नहीं है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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