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महंगाई के सीधे निशाने पर कमोडिटी वायदा!

By Staff
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नई दिल्ली, 7 मई (आईएएनएस)। कमोडिटी के वायदा कारोबार पर देश में बढ़ रही महंगाई की मार का पड़ना अब तय हो गया है। वायदा कारोबार पर पिछले दो महीनों से जारी ऊहापोह अभी भी कायम है लेकिन एक सप्ताह के घटनाक्रमों से इतना तो तय हो गया है कि कम से कम कुछेक कमोडिटी को तो बलि का बकरा बनना ही होगा।

नई दिल्ली, 7 मई (आईएएनएस)। कमोडिटी के वायदा कारोबार पर देश में बढ़ रही महंगाई की मार का पड़ना अब तय हो गया है। वायदा कारोबार पर पिछले दो महीनों से जारी ऊहापोह अभी भी कायम है लेकिन एक सप्ताह के घटनाक्रमों से इतना तो तय हो गया है कि कम से कम कुछेक कमोडिटी को तो बलि का बकरा बनना ही होगा।

वायदा कारोबार पर प्रतिबंध लगाने की संभावना को बल सोमवार को केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के बयान से भी मिला है। एशियाई विकास बैंक की मैड्रिड में आयोजित सालाना बैठक से इतर चिदंबरम ने सोमवार को कहा कि सरकार खाद्य जिंसों के वायदा कारोबार पर प्रतिबंध लगाने के संबंध में विचार कर रही है।

मंत्री के अनुसार एशियाई देशों में कमोडिटी के वायदा कारोबार में सट्टेबाजी सरकार के लिए परेशानी का सबब है। इससे पूर्व सरकार ने मार्च 2007 में चावल, तूअर और गेहूं वायदा पर प्रतिबंध लगा दिया था। इन जिंसों पर प्रतिबंध अभी भी जारी है। वित्त मंत्री का बयान ऐसे समय आया है जब देश में महंगाई पिछले 42 महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है।

केंद्रीय सांख्यिकीय संगठन (सीएसओ) से बीते शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार 19 अप्रैल को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान देश में महंगाई की दर बढ़कर पिछले 42 महीनों के उच्चतम स्तर यानी 7.57 फीसदी तक पहुंच गई। गत 12 अप्रैल को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान देश में महंगाई दर 7.33 फीसदी थी।

वायदा कारोबार पर गठित अभिजीत सेन कमेटी ने हालांकि पिछले मंगलवार को सौंपे रिपोर्ट में कमोडिटी के वायदा कारोबार को हाजिर कीमतों में वृद्धि के लिए जिम्मेदार नहीं माना है। सरकार ने इससे पूर्व योजना आयोग के सदस्य अभिजीत सेन की अध्यक्षता में पिछले वर्ष इस कमेटी को गठित की थी।

कमोडिटी विशेषज्ञ मीनाक्षी शर्मा ने आईएएनएस से बातचीत में बताया कि सबसे ज्यादा आशंका चना और आलू के वायदा कारोबार के प्रतिबंधित होने की है।

कमोडिटी के वायदा कारोबार पर संभावित प्रतिबंध के मुद्दे पर सर्वमान्य हल निकालने के लिए फारवर्ड मार्केट कमीशन (एफएमसी) के चेयरमैन बी.सी. खटुआ के उपभोक्ता मंत्रालय के अधिकारियों से मिलने की भी संभावना है।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार वायदा कारोबार पर प्रतिबंध की घोषणा सिर्फ जनता को दिखाने के लिए होगी। इसका कीमतों के नियंत्रण में कुछ भी योगदान नहीं होगा। समीक्षक तर्क देते हैं कि महंगाई में वृद्धि के लिए मुख्यतया कच्चे तेल, स्टील व सीमेंट की कीमतों में बढ़ोतरी जिम्मेदार है न कि कृषि जिंस। जहां तक खाद्य तेलों की कीमतों में तेजी का सवाल है सरकार इसकी कीमतों को नियंत्रण में लाने के लिए पर्याप्त उपायों की घोषणा कर चुकी है।

वहीं, आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि वायदा कारोबार पर प्रतिबंध के बजाए सरकार कृषि क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा दे। हाल के वर्षो में कृषि क्षेत्र में निवेश काफी कम रहा है। सरकार को चाहिए कि अल्पकालिक उपायों की जगह वह दीर्घकालिक उपायों के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत संरचना के विकास और कृषि उत्पादकता पर जोर दे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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