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चारकोल के गुणों पर वैज्ञानिकों में विवाद

By Staff
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लंदन, 2 मई (आईएएनएस)। लकड़ी से बनने वाले कोयला (चारकोल) जमीन में कार्बन को अवशोषित करने का माध्यम है, इस वर्षों पुरानी वैज्ञानिक अवधारणा पर सवालिया निशान लग गया है।

हाल ही में हुए एक अध्ययन में पाया गया है कि लकड़ी से बनने वाला कोयला न तो जमीन के भीतर कार्बन को अवशोषित करता है और न ही जलवायु परिवर्तन को रोकने में किसी और तरीके से हमारी मदद करता है।

अध्ययन के अनुसार जब लकड़ी से बनने वाले कोयले को खाद-मिट्टी के साथ मिलाया गया तो पाया गया कि उसमें मौजूद जीवाणुओं और फफूंद की मात्रा में वृद्धि हुई ये जीवाणु मिट्टी में कार्बन का विघटन करते हैं जिससे कार्बन डाई आक्साइड गैस निकलती है जो कि जलवायु परिवर्तन के लिए जिम्मेदार हैं।

इस अध्ययन से उस धारणा को झटका पहुंचा है जिसमें माना जाता था कि लकड़ी से बनने वाला कोयला कार्बन का पूर्ण अवशोषण कर लेता है। वह ऐसा करता है लेकिन उतने व्यापक पैमाने पर नहीं।

स्वीडिश यूनिवर्सिटी आफ ऐग्रीकल्चर साइंस के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए इस अध्ययन के निष्कर्ष 'साइंस' पत्रिका के ताजा अंक में प्रकोशित हुई है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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