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बेनजीर-मुशर्रफ समझौता जरदारी पर मुसीबत

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Zardari Musharraf
इस्लामाबाद 30 अप्रैल: पाकिस्तान की दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो और राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के बीच चुनाव से पूर्व हुआ समझौता भुट्टो के पति और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के सह अध्यक्ष आसिफ अली जरदारी के लिए मुश्किल का सबब बन चुका है।

समाचार पत्र 'द न्यूज' के अनुसार इस समझौते के कारण जरदारी को मुशर्रफ के साथ 'कार्यकारी संबंध' रखना जरूरी हैं।

पीपीपी प्रवक्ता फरहतुल्लाह बाबर ने माना है कि मौजूदा हालात के कारण जनता के बीच असमंजस बनी हुई है। हालांकि उन्होंने भरोसा दिलाने की कोशिश की कि मुशर्रफ का सत्ता पर एकाधिकार नहीं रहेगा।

दरअसल गत अक्तूबर में राष्ट्रपति चुनाव से एक दिन पूर्व मुशर्रफ द्वारा 'नेशनल रिकन्सिलिएशन ऑर्डिनेंस' (एनआरओ) लागू किए जाने के बाद भुट्टो और जरदारी के खिलाफ तमाम भ्रष्टाचार के आरोप रद्द कर दिए गए थे।

पीपीपी प्रवक्ता के अनुसार पार्टी केवल फौजी राष्ट्रपति के विरोध में थी। पश्चिमी शक्तियों के सहयोग से पीपीपी मुशर्रफ के साथ कार्यकारी संबंध बनाने में सफल रही है। इसमें एनआरओ की भी बड़ी भूमिका है।

इसके विपरीत सत्तारूढ़ गठबंधन का दूसरा दल पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) मुशर्रफ को राष्ट्रपति पद पर नहीं देखना चाहता।

दोनों दलों के बीच मुशर्रफ के खिलाफ महाभियोग चलाने पर भी विचार हुआ, लेकिन जरदारी इसके इच्छुक नहीं दिखते।

उधर पीपीपी के कार्यकर्ताओं का सवाल है कि मुशर्रफ के वफादार मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) महमूद दुर्रानी को प्रधानमंत्री का राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार क्यों नियुक्त किया गया है।

समाचार पत्र के अनुसार जनता में आम धारणा है कि केवल चेहरे बदले हैं। देश में काम पहले की ही तरह चल रहा है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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