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मध्यप्रदेश के गरीबों को सरकार नहीं, कारिंदों पर शक

By Staff
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भोपाल, 25 अप्रैल (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश में गरीबों को सस्ता अनाज देने की योजना का 26 अप्रैल को श्रीगणेश हो रहा है। हर किसी को उम्मीद है कि जरूरतमंदों को रियायती दर पर अनाज मिलना शुरू होने से शायद इस प्रदेश में अब कोई भूखा नहीं सोएगा। सरकार की मंशा नेक है और लोगों को उस पर भरोसा भी है, मगर सरकारी मशीनरी पर लोग शक कर रहे हैं।

राज्य में मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना के जरिए गरीबों की पेट भरने की मुहिम का आगाज हो रहा है। इस योजना के तहत गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले परिवारों को तीन रुपए किलो गेहूं और साढ़े चार रुपए किलो चावल दिया जाएगा। सरकार ने इसके लिए जमीनी स्तर पर सारी तैयारियां पूरी कर ली हैं।

भोपाल के अमराई इलाके में रहने वाले राजकुमार मालवीय कहते हैं कि प्रदेश सरकार की यह योजना हम गरीबों के लिए काफी मददगार साबित होगी। सरकार जिस दाम पर उन्हें अनाज दे रही है, उससे यह योजना वाकई में उनकी परेशानियों को हल करने में सहायक होगी।

महाराणा प्रताप नगर में जल जीरा का ठेला लगाने वाले सुरेश ने सरकार की योजना को तो अच्छा बताया,लेकिन उन्होंने सरकारी कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर भी उंगली उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार अनाज तो भेज देती है मगर राशन की दुकान चलाने वाले सामग्री का वितरण ही नहीं करते। ऐसे में उन्हें लगता नहीं है कि इस योजना का लाभ गरीबों को मिल पाएगा। उनका मानना है कि सरकार की योजना तभी सफल हो सकती है, जब सरकारी मशीनरी के काम करने के तरीके में बदलाव लाने का प्रयास हो।

छतरपुर जिले के किशोर सागर तालाब के पास रहने वाले बुजुर्ग अनुरागी दम्पति तो सरकार की योजना और घोषणाओं को कागजी से आगे ज्यादा कुछ भी मानने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने बताया कि उनकी आय का कोई जरिया नहीं है। जब वे जवान थे, तब उन्होंने मेहनत करके मकान बनवा लिया था। आज वही मकान उनके लिए समस्या बन गया हैं क्योंकि सरकारी कर्मचारी उन्हें गरीब मानने को ही तैयार नहीं हैं। वे कहते हैं कि सरकार चाहे जो तय कर ले, मगर करना तो उन्हीं सरकारी कर्मचारियों को है जो अब तक जैसा चाहते हैं वैसा करते आए हैं।

लोगों का मत है कि गरीबों के कार्ड बनाने और सस्ता अनाज वितरण में सरकार को न्यायपालिका के उस सिद्घांत का पालन करना चाहिए जिसमें कहा गया हैं कि सौ दोषी छूट जाएं मगर एक निर्दोष को सजा नहीं मिलना चाहिए। ठीक इसी तरह सौ अमीरों को लाभ मिल जाए मगर एक गरीब भी इससे वंचित नहीं रहना चाहिए। अगर सरकार ऐसा कानून बना दे तो वाकई में कोई भी गरीब भूखा नहीं रह पाएगा।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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