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पानी की चाह में बिहारवासियों का सूखेगा गला

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Water Problem
पटना, 23 अप्रैलः बढ़ती गर्मी के साथ ही बिहार में लोगों की परेशानियां भी बढ़ गयी है। प्रदेश में लोगों का हाल बुरा है लेकिन सरकारी महकमे का हाल यह है कि लाखों चापाकल गड़ने के इंतजार में यूं ही फाइलों में पड़े रह गए।

राज्य में पिछले तीन वर्षों में विधायक कोटे के 10,706 और विधान पार्षद कोटे से 14,110 चापाकल नहीं लगाये जा सके। राज्य में 61,495 सरकारी विद्यालय आज भी चापाकल से वंचित हैं। इसी तरह लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा जिले के विभिन्न टोलों में लगने वाले एक लाख से ज्यादा चापाकल भी नहीं लगाये जा सके है। तेरह जिलों में पुराने की जगह 10,520 नया चापाकल लगाना था, लेकिन वह भी आज तक नहीं लगाया जा सका है।

राज्य में ग्रामीण पाईप जलापूर्ति योजनाओं का भी बुरा हाल है। प्रखंड मुख्यालायों के लिए नाबार्ड द्वारा स्वीकृत योजनाओं के तहत तीन वर्षो में 153 पाइप लाइनें बिछानी थीं, किन्तु इस मोर्चे पर नाम मात्र ही काम हो पाया है।

नई ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं की भी स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। पाइप की कमी के कारण तीन साल में 25 प्रतिशत ही काम हो पाया है, जबकि इसके तहत 60 योजनाएं स्वीकृत थीं। थक-हार कर विभाग ने इन योजनाओं को नये वित्तीय वर्ष की योजनाओं में शामिल किया था।

इसके अलावा लौह निष्कासन संयंत्र के साथ 1,437 चापाकल लगाये जाने थे, इस पर भी कोई काम नहीं हुआ। कायरें की शिथिलता पर लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के अभियंता प्रमुख सह विशेष आप्त सचिव मदन कुमार ने कहा, "एक तो समय पर ठेका जारी नहीं किया गया और जब जारी हुआ तो मामला अदालत में चला गया। अब अदालत का फैसला आ गया है। अब काम प्रारंभ कर दिया जाएगा।"

बहरहाल, सरकारी दावे जो भी हों लेकिन इतना तय है कि अगर सरकार अभी से ही चापाकल लगाने के लिए कमर कस ले तब भी ये चापाकल बरसात तक ही लग पायेंगे और तब तक लोगों को गर्मी में पानी के लिए परेशान होना होगा।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस

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