एक मेला समर्पित सिन्दूर को
विशेष तौर पर उत्तर प्रदेश के अमेठी, सुल्तानपुर व इलाहाबाद के व्यापारी यहां सिन्दूर की बिक्री करने आते हैं तथा इस मेले में आने वाली महिलाएं बेहतर गुणवत्ता तथा कई किस्मों में उपलब्ध सिन्दूर यहां से ले जाना नहीं भूलती हैं।
गुलनाज, अरारोट, विभिन्न रसायनों तथा मेहरून, हरा, पीला तथा अन्य रंगों को एक साथ मिलाकर ढेरियों का रूप दिया जाता है। फिर पैरों से मसलकर तथा महीन कपड़े से छानकर सिन्दूर बिक्री के लिए तैयार किया जाता है।
उत्तर प्रदेश से आए सिन्दूर विक्रेताओं के अनुसार अमेठी में घर-घर में सिन्दूर का निर्माण किया जाता है तथा वहां का सिन्दूर ग्राहकों में विशेषत: प्रसिद्ध तथा लोकप्रिय है। इस मेले में उत्तर प्रदेश के दूर-दराज के इलाके से आए इन सिन्दूर विक्रेताओं की दुकाने अपनी अनोखी रौनक तथा महिला ग्राहकों के उत्साह व आकर्षण का केन्द्र बनी रहती हैं तथा अलग ही छटा बिखेरती हैं। इन सिन्दूर विक्रेताओं के लिए भी यह मेला बेहद मुनाफे का सौदा साबित होता है और इस मेले की अवधि में लाखों रुपए का सिन्दूर बिक जाता है।


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