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ग्रंथियों को भारत से न बुलाया जाए , मलेशिया सरकार की सलाह

By Staff
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कुआलालंपुर, 20 अप्रैल (आईएएनएस)। मलेशियाई सरकार ने सिख समुदाय को सलाह दी है कि वह धार्मिक ग्रंथियों को भारत से बुलाने के स्थान पर देश में ही प्रशिक्षित करे।

इसके जवाब में सिख समुदाय ने देश के विशाल तमिल हिंदू समुदाय से मिलती-जुलती अपनी परेशानियां सरकार के समक्ष रखी हैं।

उल्लेखनीय है कि मलेशिया सरकार ने गत सप्ताह हिंदू पुजारी, संगीतकार और काश्तकारों के वीजा और परमिट के नवीकरण को मंजूरी दी थी। यह मंजूरी मुख्यत: तमिल समुदाय को मिली थी।

उपप्रधानमंत्री नाजिब तुन रजाक से बैठक के बाद मलेशियन गुरुद्वारा परिषद के सचिव मलकीत सिंह ने शनिवार को कहा, "स्थानीय सिख युवा 700-800 आरएम (250 डॉलर) में काम करने को तैयार नहीं। इसके अतिरिक्त इस काम के लिए गहन प्रशिक्षण भी चाहिए होता है।"

मलकीत सिंह का कहना है कि पंजाबी भी कम ही लोग सीखते हैं। उनके अनुसार पंजाबी सिखाने वाले सब विद्यालय सरकारी अनुदान के बिना ही चल रहे हैं।

गौरतलब है कि तमिल समुदाय के पुजारियों को भी संस्कृत सीखना आवश्यक होता है।

उधर बैसाखी के अवसर पर परिषद ने एक रात्रिभोज का आयोजन किया था। इस मौके पर रजाक के स्थान पर उनके विभागीय मंत्री हसन मलेक ने शिरकत की।

मलकीत सिंह का कहना है कि सिख समुदाय की सहायता हेतु परिषद अनेक योजनाओं पर काम कर रही है। अगले महीने उनके लिए एक कानूनी सहायता और सलाहकार केंद्र भी स्थापित किया जाएगा।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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