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बिहार में वित्तरहित शिक्षाकर्मियों ने आंदोलन का बिगुल फूंका

By Staff
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पटना, 20 अप्रैल (आईएएनएस)। वित्तरहित शिक्षा नीति समाप्त कर राज्य सरकार अपनी पीठ खुद थपथपा रही हो लेकिन शिक्षक नेता इस नीति से पूरी तरह खफा हैं और सरकार के इस फैसले के खिलाफ आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। अब आंदोलन के तीसरे चरण में 24 अप्रैल को जिला मुख्यालयों पर धरना दिया जाएगा। साथ ही पटना में शिक्षककर्मी राज्यपाल के समक्ष धरना भी देंगे।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पिछले दिनों विधानमंडल में शिक्षा क्षेत्र में व्यापक सुधार के तहत वित्तरहित शिक्षा नीति को समाप्त करने की घोषणा की थी। मुख्यमंत्री ने कहा था कि शिक्षण संस्थानों को छात्र-छात्राओं के अच्छे प्रदर्शन के आधार पर ही सरकारी अनुदान प्राप्त होगा। लेकिन पिछले 25 वर्षो से चली आ रही वित्तरहित शिक्षा नीति को सरकार ने जिस प्रक्रिया के तहत वित्तसहित किया है, उसका शिक्षकों ने विरोध किया है।

शिक्षकों का मानना है कि छात्र-छात्राओं के प्रदर्शन के आधार पर अनुदान देने की घोषणा सरासर गलत एवं वित्तरहित शिक्षाकर्मियों के साथ धोखा है। एक तरफ जहां मुख्यमंत्री का मानना है कि इस नई व्यवस्था से शिक्षण संस्थानों को व्यापक शक्ति मिलेगी, वहीं शिक्षक नेताओं का कहना है कि पूर्व की शर्तो जिसमें अन्य शिक्षण संस्थानों की तरह वित्तरहित शिक्षाकर्मियों को अधिग्रहण करने की बात थी, को सरकार ने नहीं मान इस नीति से जुड़े शिक्षकों के साथ छल किया है।

सरकार की नीतियों का विरोध करते हुए वित्तरहित शिक्षा संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष रामविनेश्वर सिंह ने बताया कि प्रस्तावित आंदोलन के प्रथम चरण में शिक्षककर्मी 15 अप्रैल को राज्यव्यापी हड़ताल पर थे। उसी दिन शिक्षकों ने इंटरमीडिएट की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन कार्य भी नहीं किए। सिंह ने बताया कि आंदोलन के दूसरे चरण में 16 अप्रैल से 23 अप्रैल तक शिक्षक काला बिल्ला लगाकर उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कर रहे हैं।

सिंह ने कहा कि अगर सरकार ने इसके बाद भी इस नीति को समाप्त नहीं किया, तो बिहार विधान मंडल के आगामी सत्र के प्रथम दिन से ही शिक्षक जेल भरो अभियान शुरू करेंगे। मोर्चा के नेता ने कहा कि वित्तरहित शिक्षा नीति के शिकार 70 हजार शिक्षाकर्मियों एवं उनके परिवार के सदस्य खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि राज्यभर में 240 डिग्री महाविद्यालय, 507 इंटरमीडिएट महाविद्यालय, 750 माध्यमिक विद्यालय और 750 संस्कृत विद्यालय वित्तरहित शिक्षा नीति के तहत संचालित हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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