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उत्तराखण्ड में आज होगा चुनावी महासंग्राम

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Uttarakhand Elections
देहरादून 19 अप्रैल: उत्तराखण्ड में स्थानीय निकाय तथा नगर निगमों व नगर पालिकाओं के चुनावों का महासंग्राम आज सुबह से ही प्रारंभ हो जाएगा। अगले वर्ष होने वाले लोकसभा चुनावों को ध्यान मं रखते हुए यह चुनाव एक तरह से राजनैतिक दलों के लिए प्राथमिक परीक्षा साबित हो सकते हैं।

प्रदेश में 60 निकायों के लिए होने वाले इन चुनावों में अध्यक्ष व सभासद पदों के लिए कुल 3405 प्रत्याशी इस चुनावी दंगल में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, जिनकी किस्मत का फैसला आज शनिवार शाम तक मतपेटियों में बन्द हो जाएगा।

आज होने वाले मतदान के लिए प्रशासनिक इंतजाम पूरी तरह चुस्त दुरुस्त व चौकस हैं। प्रत्येक नगर में शांति व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए किए गए हैं तथा कुछ जगहों पर फ्लैग मार्च भी किया गया है।

सम्पूर्ण उत्तराखण्ड के 14,22,766 मतदाता इन 3405 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला लिखेंगे। प्रदेश के कुल 8 प्रत्याशी निर्विरोध घोषित किए जा चुके हैं। यह चुनावी प्रक्रिया प्रदेश भर के कुल 659 मतदान केंद्रों पर सम्पन्न होगी।

इन चुनावों में प्रदेश में सत्ताधीन भाजपा व कांग्रेस द्वारा टिकट वितरण में किए गए पक्षपात व त्रुटियों का खामियाजा इन दोनों ही दलों को भुगतना पड़ सकता है क्योंकि दोनों की दलों के बागी प्रत्याशियों ने इन दलों के विरुद्ध मोर्चा खोल रखा है। वहीं कई दिग्गज नेताओं के लिए यह चुनाव प्रतिष्ठा का प्रश्न बन चुका है, जिसके कारण यह चुनाव जीतने के लिए राजनेता कोई भी हथकण्डा अपनाने से नहीं चूक रहे हैं, जिनमें मतदाताओं को विभिन्न प्रकार के प्रलोभन शामिल हैं।

बेहद याद आए गोपाल कृष्ण द्विवेदी:

जहां एक ओर उत्तराखण्ड में शनिवार को होने जा रहे स्थानीय निकाय चुनावों में राजनैतिक दल व प्रत्याशी चुनाव जीतने के लिए हर तरह से होड़ में लगे हैं, वहीं इस अंधी होड़ के चलते इनके द्वारा अपने प्रचार के लिए अमल में लाए जा रहे अनुचित तरीकों का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।

ज्ञातव्य है कि इन चुनावों में विभिन्न राजनैतिक दलों तथा प्रत्याशियों द्वारा समस्त मानदंडों को ताक पर रखकर बेहद तेज आवाज में कानफोड़ू लाउडस्पीकरों द्वारा, जगह जगज अवैध रूप से पोस्टर व अन्य प्रचार सामग्री के अंधाधुंध प्रयोग से प्रदेश की सूरत ही बिगड़ गई है। चुनावों के बाद भी इस प्रचार सामग्री से बदशक्ल हुई देवभूमि की सूरत सही होने में महीनों लग जाएंगे।

ऐसे में आम जनता को पिछले स्थानीय निकाय चुनावों के समय यहां कार्यरत तेजतर्रार जिलाधिकारी गोपाल कृष्ण द्विवेदी की बरबस ही याद आ गई जिन्होंने अपनी बेहद ईमानदार व तेजतर्रार शैली के चलते पिछले चुनावों में राजनैतिक दलों के चुनाव अभियान को पूरी तरह से नियंत्रण की रेखा में बांध कर रख दिया था।

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