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यूपी में हर साल 3000 लोग करते हैं खुदकुशी

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लखनऊ, 19 अप्रैलः यूपी में हर साल करीब तीन हजार लोग खुदकुशी कर लेते हैं। बीते साल में यहां करीब सत्ताइस सौ लोगों ने आत्महत्या की। इस गम्भीर मुद्दे पर चर्चा करने के लिए प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) विक्रम सिंह ने स्वयंसेवी संस्था 'अस्मिता' के सहयोग से आगामी 21 अप्रैल को योजना भवन में एक गोष्ठी का आयोजन किया है।

यूपी में आत्महत्या संबंधी आंकड़े को राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो ने डीजीपी मुख्यालय को उपलब्ध कराए हैं। इन आंकड़ों ने खुद पुलिस महकमे को हैरानी में डाल दिया है। बीते दिनों प्रदेश की राजधानी में किशोरों और बच्चों द्वारा की जा रही आत्महत्या से इस गोष्ठी की जरूरत महसूस की गई थी जिससे इसके कारण व निवारण के उपाय किए जा सकें।

अस्मिता संस्था के डा. कृष्णकांत ने बताया कि इस गोष्ठी के लिए एकत्रित आंकड़े हैरान करने वाले हैं। आंकड़े बताते हैं कि देश में करीब 2,400 छात्र परीक्षा के तनाव या फिर फेल हो जाने पर खुदकुशी कर लेते हैं। यही नहीं यूपी में साल 2006 में 3,099 लोगों ने आत्महत्या कर ली थी।

उन्होंने बताया कि बीते छह साल में यहां आत्महत्याओं का औसत 3,400 रहा है। इसमें पारिवारिक कलह के कारण 436 लोगों ने, परीक्षा के तनाव के कारण 95 लोगों ने और गरीबी की वजह से 54 लोगों ने मौत को गले लगा लिया। पूरे देश के हालात यह हैं कि साल 2007 में एक लाख 16 हजार लोगों ने आत्महत्या की। दस मामले में देश में सबसे ऊपर पश्चिम बंगाल है।

डीजीपी विक्रम सिंह का मानना है कि आंकड़े इसकी निशानी हैं कि हमें इस मुद्दे को गंभीरता से लेना होगा। लिहाजा इसमें 21 अप्रैल को प्रदेश के हर जिले से एक पुलिस अधिकारी अवश्य शिरकत करेगा ताकि खुदकुशी के मामलों के बढ़ने पर अंकुश लगाया जा सके।

डा. कृष्णकांत ने बताया कि इस गोष्ठी का उद्घाटन प्रमुख सचिव गृह डा. जे. एन. चेंबर करेंगे। कार्यक्रम में शिक्षाविदों के साथ मनोचिकित्सक और समाज के लिए कार्यरत संस्थाएं भी उपस्थित होंगी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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