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भाजपा में मेरी वापसी का सवाल ही नहीं: उमा

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Uma Bharti
जोशीमठ, 18 अप्रैलः भारतीय जनशक्ति (भाजश) की राष्ट्रीय अध्यक्ष व मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में अपनी वापसी की संभावनाओं को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उनके मुताबिक भाजपा में वैचारिक प्रतिबद्घता का अभाव है, इसलिए उनकी वापसी का कोई सवाल ही नहीं उठता।

उमा ने भाजपा में अपनी वापसी की संभावनाओं को पूरी तरह दरकिनार कर दिया। उन्होंने कहा, "मेरी वापसी की खबरें षडयंत्र मात्र हैं। भाजपा की ओर से जानबूझ कर मीडिया को मेरी वापसी के बारे में भ्रमित किया जाता है और मीडिया भी उनके दुष्चक्र में फंस जाता है।"

उमा कहती हैं, "वापसी के बारे में मेरी न तो कभी भाजपा के नेताओं से बात हुई है और न ही वह इस बारे में बात करते हैं। दरअसल, भाजपा के नेता मेरी विश्वसनीयता के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं ताकि मेरे कार्यकर्ता भ्रमित हो जाए और उन्हें इसका लाभ मिल सके।"

उन्होंने कहा कि देश की जनता की आंखों में धूल झोंककर भाजपा ने आज देश के बहुत बडे राजनीतिक क्षेत्र को अपने कब्जे में कर रखा है। भाजपा की मौजूदा स्थिति को देखकर मुझे बहुत दुख होता है। मुददों को लेकर वह पूरी तरह दुविधा में है और उसके रूख में कहीं स्पष्टता नहीं है, चाहे वह राम सेतु का मामला हो, हिन्दुत्व का हो, विशेष आर्थिक क्षेत्रों का हो या फिर तिब्बत का मामला।

उमा ने कहा, मुददों व वैचारिक प्रतिबद्धता के मामले में मेरी पार्टी भाजपा से कहीं आगे है। भाजपा में जहां वैचारिक स्पष्टता का अभाव है वहीं भाजश की वैचारिक स्थिति बिल्कुल स्पष्ट है। उन्होंने दावा किया कि रामसेतु विवाद को एक बड़ा आंदोलन का रूप देने में उन्होंने सबसे पहले सक्रियता दिखाई।

उन्होंने कहा हमारे पास स्पष्टता ही थी कि हमने गुजरात के चुनावी मैदान से अपने उम्मीदवारों को मैदान से हटा दिया ताकि हिन्दूवादी ताकतें विभाजित न हो। विशेष आर्थिक क्षेत्रों के खिलाफ सबसे पहले उनकी पार्टी ने ही मोर्चा खोला, जबकि इन मुद्दों पर भाजपा के रूख में स्पष्टता नहीं है।

तिब्बत के मौजूदा आंदोलन के बारे में उमा कहती हैं, "तिब्बत अब सिर्फ चीन का मामला नहीं रहा। यह अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार से जुड़ा है। इस नाते भारत सरकार को दखलअंदाजी करनी चाहिए और जरूरी हो तो उसे अपनी नीतियों में बदलाव लाना चाहिए।"

उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय खेल संघों से अपील की कि वह ओलंपिक खेलों के मद्देनजर चीन पर दबाव बनाए ताकि तिब्बतियों के खिलाफ चीनी हिंसा समाप्त हो और खेलों के शुरु होने से पहले तिब्बत में शांति स्थापित हो।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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