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सेज विकास में सहायक: रियल एस्टेट

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Special Economic Zone
नई दिल्ली 16 अप्रैल: विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज) की विशेषताओं और कमियों पर चल रही बहस के मद्देनजर रीयल एस्टेट से संबंध उद्योग जगत का कहना है कि सेज भारत के बुनियादी ढांचे के विकास में सहायक साबित होंगे।

इस क्षेत्र की अग्रणी कंपनी 'ओमैक्स' के अध्यक्ष रोहताश गोयल कहते हैं, "विश्व स्तरीय औद्योगिक ढांचे का निर्माण महंगा है। विशेष आर्थिक क्षेत्रों को बढ़ावा देकर विकास के ऐसे क्षेत्रों की शुरुआत की जा सकती है।"

उन्होंने कहा कि जरूरतों को देखते हुए सरकार को विशेष आवासीय क्षेत्रों का भी निर्माण करना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि सेज को मिला बढ़ावा एक मुनाफाकारी प्रस्ताव है। आंकड़ों के अनुसार अब तक 214 सेज परियोजनाओं हेतु जमीन अधिसूचित कर दी गई है। साथ ही सेज और आवासीय क्षेत्रों के लिए क्रमश: 439 और 138 योजनाओं को भी हरी झंडी दिखाई जा चुकी है।

प्रमुख क्रेडिट रेटिंग एजेंसी 'क्रिसिल' के कार्यकारी निदेशक और प्रमुख अर्थशास्त्री सुबीर वी. गोकरन कहते हैं, "विकासकर्ताओं को प्रोत्साहन देकर सरकार जरूरी निवेश का मार्ग प्रशस्त कर रही है।"

इस दिशा में सेज के निदेशक एस. एन. शर्मा का कहना है, "तेज आर्थिक विकास के लिए विशेष आर्थिक क्षेत्र जरूरी इसलिए है कि यह स्थानीय कानूनों, रेड टेप और अनेक सरकारी अधिकारियों से उद्योग को मुक्ति दिलाते हैं।"

उधर भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के अनुसार सेज से निर्यात में 200 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और इससे 17.66 अरब डॉलर के निवेश का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

सीआईआई के एक अध्ययन के अनुसार वर्ष 214 सेज परियोजनाओं से 2008-09 में 25 अरब डॉलर से अधिक का निर्यात किया जाएगा और दस हजार अतिरिक्त रोजगार के अवसर भी बने हैं।

सेज पर उठने वाले विवादों के बारे में शर्मा कहते हैं, "किसानों को डर मुआवजे के बारे में सही सूचना के अभाव में हैं।"

वह कहते हैं सेज के लिए अधिगृहित भूमि समूची कृषि योग्य भूमि का केवल 0.12 प्रतिशत ही है।

गोखरन के अनुसार, "इसके लिए मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति की जरूरत है। सरकार को बेहतर योजनाएं जारी करनी चाहिए जिससे जिन किसानों की जमीन ली जाती है उनके पुनर्वास और उसी आर्थिक क्षेत्र रोजगार का बंदोबस्त हो सके।"

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