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यूपी में कांग्रेस व भाजपा की दुर्गति का सिलसिला जारी

By Staff
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लखनऊ, 16 अप्रैल (आईएएनएस)। प्रदेश की दो लोकसभा और तीन विधानसभा सीटों के नतीजों ने जहां सत्तारूढ़ बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की बांछे खिला दीं वहीं प्रमुख विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) के खेमे में एक भी सीट न जीत पाने पर मायूसी का आलम है। केन्द्र की सत्ता के दावेदार दो सबसे बड़े राष्ट्रीय दलों कांग्रेस और भाजपा की सबसे ज्यादा लोकसभा सीटों वाले राज्य में दुर्गति का सिलसिला बदस्तूर जारी है। भाजपा और कांग्रेस क्रमश: आजमगढ़ लोकसभा एवं करनैलगंज विधानसभा क्षेत्र में ही अपनी-अपनी जमानत बचा पाईं।

लखनऊ, 16 अप्रैल (आईएएनएस)। प्रदेश की दो लोकसभा और तीन विधानसभा सीटों के नतीजों ने जहां सत्तारूढ़ बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की बांछे खिला दीं वहीं प्रमुख विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) के खेमे में एक भी सीट न जीत पाने पर मायूसी का आलम है। केन्द्र की सत्ता के दावेदार दो सबसे बड़े राष्ट्रीय दलों कांग्रेस और भाजपा की सबसे ज्यादा लोकसभा सीटों वाले राज्य में दुर्गति का सिलसिला बदस्तूर जारी है। भाजपा और कांग्रेस क्रमश: आजमगढ़ लोकसभा एवं करनैलगंज विधानसभा क्षेत्र में ही अपनी-अपनी जमानत बचा पाईं।

चिंता की लकीरें सपा के माथे पर भी गहरा गई हैं। अभी चंद महीने पहले बलिया लोकसभा सीट का उपचुनाव जीतने से लौटे सपा के आत्मविश्वास की चूलें बुरी तरह हिल गई हैं। जातीय संतुलन बिठा पाने में विफलता और प्रत्याशी चयन को लेकर उठा विवाद सपा के लिए आत्ममंथन के मुख्य बिंदु हैं।

भाजपा और कांग्रेस के बीच तो जैसे पिछड़ने की होड़ सी लगी हुई है। न तो उत्तर प्रदेश में राहुल गांधी की बढ़ती सक्रियता कांग्रेस के हक में कुछ कर पा रही है और न ही लालकृष्ण आडवाणी को भावी प्रधानमंत्री के रूप में पेश करने की भाजपा की कवायद ने ही उत्तर प्रदेश में कोई असर दिखाया है। इन उपचुनावों में इन दोनों दलों के प्रदर्शन पर एक नजर डालने से ही सब कुछ साफ हो जाता है।

आजमगढ़ लोकसभा सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी को 1.84 प्रतिशत, बिलग्राम विधानसभा सीट पर 1.7 प्रतिशत तथा मुरादनगर विधानसभा सीट पर 3.8 प्रतिशत मत हासिल हुए। अलबत्ता करनैलगंज में 17.4 प्रतिशत मत पाकर कांग्रेस अपनी जमानत बचा पाने में सफल रही जबकि खलीलाबाद लोकसभा सीट पर कांग्रेस 16.24 प्रतिशत वोट पाकर जमानत बचाने के बिल्कुल करीब तक पहुंच गयी थी। गौरतलब है कि जमानत बचाने के लिये प्रत्याशी को कुल पड़े वोटों का 1/6 हिस्सा (16.6 प्रतिशत) हासिल करना होता है।

भाजपा की जमानत केवल आजमगढ़ में ही बच सकी जहां उसे 28.4 प्रतिशत वोट मिले। खलीलाबाद में भाजपा को 10.37 प्रतिशत, करनैलगंज में 3.5 प्रतिशत, बिलग्राम में 5.03 प्रतिशत तथा मुरादनगर में केवल 1.35 प्रतिशत वोट मिले। यह प्रदर्शन भाजपा की कहानी खुद ही बयां कर रही है।

इन दो राष्ट्रीय दलों की तुलना में बसपा को आजमगढ़ में 37.3 प्रतिशत, खलीलाबाद में 37.5प्रतिशत, मुरादनगर में 43.9 प्रतिशत, बिलग्राम में 56.8 प्रतिशत और करनैलगंज में 40 प्रतिशत वोट मिले। इन्हीं सीटों पर सपा को क्रमश: 25.7, 26.4, 9.4, 37.2 और 32.4 प्रतिशत मत मिले।

जाहिर है कि सपा के लिए संतोष की बात यही हो सकती है कि वह सत्तारूढ़ बसपा के लिए सबसे प्रमुख चुनौती है लेकिन उसकी यह चुनौती सशक्त होने के बजाय कमजोर होती नजर आ रही है। अलबत्ता राष्ट्रीय लोकदल ने मुरादनगर में बसपा को कड़ी टक्कर दी और यह उसके लिये कुछ हद तक तसल्लीबख्श हो सकता है।

लोकसभा चुनाव अभी भी चंद महीने दूर हैं और राजनीति में बदलाव की बयार भी बदलते देर नहीं लगती लेकिन मौजूदा सियासी बयार केवल बसपा के लिये खुशगवार है। बसपा फिलहाल अपनी सामाजिक और जातीय संरचना और समीकरणों को लेकर आश्वस्त हो सकती है जबकि अन्य सभी के लिए चुनाव नतीजों में सबक ही छिपे हैं। खासकर भाजपा और कांग्रेस को मौजूदा हालात में दिल्ली की सत्ता हासिल करने में उत्तर प्रदेश से कुछ खास हाथ आता नजर नहीं आता।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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