उत्तराखण्ड में चुनावी बुखार जोरों पर

वहीं प्रदेश कांग्रेस व भाजपा हाईकमान ने टिकटों के वितरण में अपनाए गए पक्षपातपूर्ण रवैये को लेकर उम्मीदवारों में खिंची तलवारों तथा भीरतघात के कारण राजनैतिक दलों में संकट की स्थिति है। टिकट न मिलने से नाराज होकर बागी हुए प्रत्याशियों व कार्यकर्ताओं को पार्टी हाईकमान द्वारा दी जा रही निष्कासन की धमकियां भी उनके तेवर ढीले करने में अक्षम हैं।
इस उठापटक के कारण इन चुनावों के पूर्वानुमानित सारे समीकरण गड़बड़ा जाने के आसार लग रहे हैं. कुछ प्रत्याशियों ने टिकट ने मिलने पर पार्टी से बगावत करके निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अपनी दावेदारी पेश की है। जनपद उधम सिंह नगर में काशीपुर की बागी निर्दलीय प्रत्याशी ऊषा चौधरी तथा किच्छा की बागी प्रत्याशी शारदा धीमान पार्टी के प्रत्याशियों के लिए सिरदर्द बनी हुई हैं।
प्रशासनिक अमला भी अगले वर्ष होने जा रहे लोकसभा चुनावों से पहले होने जा रहे इन महत्वपूर्ण चुनावों को शांतिपूर्ण निपटाने में पूरी तत्परता से लगा हुआ है। चुनाव प्रचार में प्रयोग की जाने वाली प्रचार सामग्री के पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों से बचने के लिए इन चुनावों में चुनाव आयोग के नए दिशानिर्देशों के अनुसार प्लास्टिक, पोलिथिन तथा फ्लेक्सीशीट से बनी प्रचार सामग्री पर सख्ती से रोक लगा दी गई है जिससे प्रत्याशियों के लिए एक नई मुसीबत खड़ी हो गई है क्योंकि वर्तमान में फ्लेक्सीशीट का प्रयोग सभी प्रचार सामग्री में प्रमुखता से किया जाता है।


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