उप्र में वीआईपी नंबरों के लिए मारामारी

पिछले कुछ समय से राज्य में वीआईपी नंबर की खरीद फरोख्त का धंधा भी तेजी से चल निकला है। यही नहीं इन नंबरों की मांग इतनी ज्यादा बढ़ गयी है कि इसके लिए बाकायदा बिचौलिए भी तैयार हो गए हैं। उधर, भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) ने इसकी बढ़ती मांग को देखते हुए वीआईपी नंबरों की बाकायदा नीलामी का मन बना लिया है।
मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनी बीएसएनएल, हच, एयरटेल और आइडिया कंपनी के सूत्रों ने बताया कि वीआईपी नंबरों में अंतिम अंक मायने रखती है। इन अंकों का चक्कर यह है कि इसमें तीन से लेकर सात अंक तक का नंबर एक समान हो तो वह नंबर वीआईपी माना जाता है। इसमें जितने ज्यादा नंबर की जितने अंक समान होंगे कीमत भी उतनी ज्यादा होगी।
यही नही इसमें तीन से लेकर पांच या आठ तक के एक समान नंबर लेने की कीमत सबसे ज्यादा है। मोबाइल दुनिया में हेप्टा मतलब सात की सीरीज, हेक्सा मायने छह और पेंटा मतलब पांच की सीरीज के लिये शब्द प्रयुक्त किये जाते हैं। ऐसा नहीं है कि कंपनियों ने इन वीआईपी नंबरों के लिये कोई अलग से कीमत तय कर रखी हो लेकिन यह भी सच है कि हर कंपनी नंबर की खासियत पर अपनी मनमर्जी पैसे वसूल कर रही है।
सूत्रों के अनुसार वीआईपी नंबर में भी कुछ नंबर ऐसे हैं जिनकी सबसे अधिक मांग रहती है। मसलन छह अंक में छह या शून्य सात बार आये तो समझ लीजिए कि आप मोबाइल की दुनिया में वीआईपी बन ही गये। यहां इस मामले में 420 नम्बर की अहमियत भी इसी श्रेणी में गिनी जाती है तभी तो लोग इसके लिए आठ हजार से बारह हजार तक खर्च कर देते है।
उधर बिचौलिए इनकी कीमत बताते हुए कहते हैं कि हैक्सा सिरीज के लिए 25 हजार की रकम निर्धारित है वहीं पेंटा लेने के लिए 20 हजार रुपये खर्च करने पड़ते है। वहीं 12345 सिरीज के लिए दस हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं। आखिरी में चार बार शून्य पाने के लिए छह हजार तक की कीमत चुकानी पड़ती है। जबकि आम पेंटा सिरीज प्राप्त करने के लिए दस हजार रुपये देने पड़ते है। वैसे इन सबमें सबसे मंहगा नंबर 786786 माना जाता है।
वैसे इन नंबरों में सबसे ज्यादा मांग बीएसएनएल में है। लोग यहां ऐसे नंबरों के लिए कोई भी कीमत देने के लिए तैयार रहते हैं। यहां पर बिचौलियों की नजर उन वीआईपी नंबर पर भी रहती है जो किसी व्यक्ति को खुदबखुद आवंटित हो गये हैं ये कंपनी के सर्वर में किसी तरह से उस नंबर को ब्लाक करा देते हैं फिर उसे बेच देते हैं।
वीआईपी नंबरों की बढ़ती चाहत के बारे में बीएसएनएल के प्रबंधक ओमवीर ने कहा, "हम इन नंबरों की दलाली के बारे में तो नहीं जानते और पहले हम यह नंबर किसी को भी दे देते थे लेकिन जब से इनकी मांग के बारे में पता चला है इनकी कीमत दो हजार तय का दी गयी थी। लेकिन बढ़ती मांग को देखते हुए अब हम इन नंबरों की नीलामी की योजना बना रहे हैं। जल्द ही यह योजना शुरू भी हो जायेगी।"
मोबाइल ही नहीं यही हाल यहां गाड़ियों के नंबरों को लेकर भी है। यहां पर भी वीआईपी नंबरों के चक्कर में भी परिवहन अधिकारी के आवास पर में जमावड़ा लगा रहता है। कई लोग तो गाड़ियां भी तभी खरीदते हैं जबकि उन्हें वीआईपी नंबर आसानी से मिल जाये।


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