उप्र ट्रैफिक पुलिस भी रंगी नीले रंग में

विपक्ष ने मायावती सरकार पर उत्तर प्रदेश पुलिस बल को बसपा के रंग में रंगने का आरोप लगाया है। मामले को तूल पकड़ता देख सरकार को सफाई देनी पड़ी है। राज्य के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) बृजलाल ने कहा कि यातायात पुलिस की वर्दी का रंग बदलने का बसपा से कोई संबंध नहीं है।
उन्होंने कहा कि वर्दी बदलने का फैसला वर्ष 1999 में ही हो चुका था। उस वक्त अपर पुलिस महानिदेशक की अध्यक्षता में गठित समिति ने नीली पैंट करने की सिफारिश की थी। हालांकि उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को यह फैसला अमल में लाने में 9 साल लग गये।
गौरतलब है कि यातायात पुलिस की पैंट और टोपी का रंग सफेद से नीला कर दिया गया है। यह बसपा कार्यकर्ताओं की वर्दी से काफी मिलती-जुलती है। इसी मुद्दे पर विपक्ष खासकर समाजवादी पार्टी (सपा) ने अपनी आपत्ति जताई थी। सपा के प्रदेश प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश में अब पुलिस को बसपाई रंग में रंगा जा रहा है और यातायात पुलिस की वर्दी के रंग में परिवर्तन इसकी शुरुआत है।
उन्होंने कहा कि यातायात पुलिस की वर्दी का रंग बदलने के लिए पुलिस वर्दी अधिनियम 1986 में जो संशोधन किया गया है वह पूरी तरह अनुचित है। उधर बृजलाल का कहना है कि वर्दी बदलने का फैसला सफेद पैंट जल्दी गंदी होने के कारण लिया गया। इसके अलावा देश के 14 राज्यों की यातायात पुलिस की वर्दी का रंग भी ऐसा ही है।


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