जेल की कमान आईपीएस को सौंपने पर विवाद

दिलचस्प बात यह भी है कि प्रदेश का गृह विभाग भी यह नहीं चाहता कि जेलों में पुलिस अधिकारियों की तैनाती की जाए। गृह विभाग के एक विशेष सचिव ने आईएएनएस से कहा कि अगर जेल विभाग कि अधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त हैं तो इस बात की गारंटी कैसे ली जा सकती है कि पुलिस अधिकरी यही नहीं करेंगे। इसके अलावा अगर जेल के भीतर पुलिस अधिकारी तैनात होंगे तो फिर जेल विभाग के अपने कैडरों की प्रासंगिकता पर ही सवालिया निशान लग जाएगा।
उल्लेखनीय है कि बेलगाम होते जेल विभाग की लगाम कसने के लिए मायावती सरकार ने सत्ता में आते ही पृथक जेल विभाग का अस्तित्व समाप्त करते हुए इसे गृह विभाग के अधीन कर दिया था। साथ ही पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) जेल के पद को निष्क्रिय करते हुए पुलिस महानिदेशक (डीजी) जेल को विभागीय प्रमुख की जिम्मेदारी सौंपते हुए इस पर आईएएस अधिकारी को नियुक्त कर दिया था।
प्रस्तावित नयी व्यवस्था में डीजी जेल का पद शासन में तैनात सचिव जेल संभालेगा, जबकि आईजी जेल पर आईपीएस की तैनाती होगी। आज मुख्य सचिव द्वारा बुलायी गयी जेल विभाग की बैठक में जेलों में वरिष्ठ जेल अधीक्षकों के रिक्त पदों पर अपर पुलिस अधीक्षकों को नियुक्त करने का भी प्रस्ताव है। जेल अधिकारियों के भड़कने की एक अहम वजह यह भी है।
उनका कहना है कि यह विभागीय पद हैं और विभागीय प्रोन्नति से ही भरे जाने चाहिए। इसे मुद्दे पर आक्रोशित जेल विभाग के अधिकारियों की बैठक लखनऊ में जेल प्रशिक्षण संस्थान में जारी है और इसके बाद सरकार के निर्णय के विरोध की औपचारिक घोषणा की जाएगी।


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