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आजमगढ़ में त्रिकोणीय मुकाबले की संभावना

By Staff
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लखनऊ, 5 अप्रैल (आईएएनएस)। धूप छांव की तरह कभी खुशगवार और कभी सोजगार रहने वाली आजमगढ़ की सरजमीं पर मुलायम सिंह यादव की समाजवादी पार्टी (सपा) जहां अपने परम्परागत यादव वोट बैंक की बगावत से जूझ रही है वहीं पहली बार जीत की उम्मीद पाल बैठी भाजपा ने 'यूपी भी गुजरात बनेगा, आजमगढ़ शुरूआत करेगा' का नारा देकर साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण की कोशिशें शुरू कर दी हैं।

लखनऊ, 5 अप्रैल (आईएएनएस)। धूप छांव की तरह कभी खुशगवार और कभी सोजगार रहने वाली आजमगढ़ की सरजमीं पर मुलायम सिंह यादव की समाजवादी पार्टी (सपा) जहां अपने परम्परागत यादव वोट बैंक की बगावत से जूझ रही है वहीं पहली बार जीत की उम्मीद पाल बैठी भाजपा ने 'यूपी भी गुजरात बनेगा, आजमगढ़ शुरूआत करेगा' का नारा देकर साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण की कोशिशें शुरू कर दी हैं।

बसपा सुप्रीमो मायावती सात अप्रैल को आजमगढ़ में चुनावी सभा करने आ रही हैं और पहले से ही खुद को बेहतर हालत में पा रही बसपा को विश्वास है कि इसके बाद तो उसकी जीत पर मानो मुहर लग जाएगी। उधर, कांग्रेस बस इसकी कोशिश में है कि किसी तरह वह अपनी जमानत ही जब्त होने से बचा ले।

आजमगढ़ लोकसभा सीट पर 12 अपैल को मतदान होना है और मुलायम सिंह वहां एक बार प्रचार कर आए हैं और पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने आईएएनएस को बताया कि नेताजी इतने दुखी हुए हैं कि शायद ही वह इस उपचुनाव में अब आगे वहां चुनाव प्रचार करने जाएं। अलबत्ता भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह की सभाएं आजमगढ़ में लग गयी हैं।

आइए एक नजर डालते हैं आजमगढ़ के चुनावी अतीत पर जिसका वर्तमान आज एक पहेली बनकर मतदाताओं के साथ-साथ चुनावी विश्लेषकों को भी मथ रहा है। यह सीट पिछले छह चुनावों से सपा और बसपा के बीच बंटती रही है। वर्ष 1991 में बसपा, 1996 में सपा, 1998 में बसपा, 1999 में सपा और 2004 में बसपा को विजय मिली।

भाजपा के मौजूदा प्रत्याशी रमाकांत यादव ने 1996 और 1999 में सपा प्रत्याशी के तौर पर तथा 2004 में सपा से टिकट कटने पर बसपा प्रत्याशी के रूप में विजय प्राप्त की। पिछले कुछ महीनों के दौरान मायावती से हुई अनबन के बाद वह फिर सपा में चले गए लेकिन इसी बीच दलबदल के चलते उनकी लोकसभा सदस्यता चली गयी।

बहरहाल इससे बड़ा झटका उन्हें तब लगा जब सपा ने उनका टिकट काट दिया। नाराज रमाकांत भाजपा से टिकट ले आए। रमाकांत समर्थक टिकट कटने के लिए सपा के नंबर दो नेता अमर सिंह को जिम्मेदार ठहराते हैं। उधर, सपा ने पूर्व मंत्री बलराम यादव को टिकट दिया है जो अभी पिछला विधानसभा चुनाव इसी लोकसभा क्षेत्र की अतरौलिया सीट से हार चुके हैं।

बसपा के प्रत्याशी अकबर अहमद डम्पी हैं जो 1998 में रमाकांत को हरा और 1999 में हार चुके हैं। कांग्रेस ने एहसान खां को मैदान में उतारा है जो चुनाव लड़ने के पहले कांग्रेस में नहीं थे और इसी के चलते पार्टी के लोग भी शिद्दत के साथ उनके साथ नहीं जुड़े हैं।

आजमगढ़ में यादव, मुसलमान और जाटव में से प्रत्येक के मतदाताओं की संख्या ढ़ाई से तीन लाख है और इसके बाद ठाकुर, ब्राह्मण, राजभर, वैष्य एवं अन्य जातियां हैं। यादव समुदाय का अधिक झुकाव फिलहाल रमाकांत की ओर नजर आता है और जाटव पूरी तरह बसपा के साथ है। बसपा को अधिकांश मुसलमानों के समर्थन का भरोसा है तो भाजपा की आस सवर्णों के साथ-साथ रमाकांत के निजी वोट पर टिकी है। मतदान के एक सप्ताह पहले बसपा-भाजपा-सपा के बीच त्रिकोणात्मक संघर्ष की स्थितियां हैं और हर कोई अपने को आगे रखने की कोशिशों में लगा है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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