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उम्मीदों को सींच रहे हैं उम्मेदगढ़ी के एनिकट

By Staff
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जयपुर, 3 अप्रैल (आईएएनएस)। राजस्थान में राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना आदिवासी क्षेत्रों में जरूरतमंदों के लिए जहां वरदान साबित हो रही हैं वहीं इसके बेहतर क्रियान्वयन ने जनजाति अंचलों में लोक जीवन की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने वाले संसाधनों के सृजन के साथ विकास के लिए नए सफर का परिचय दिया है।

खेती-बाड़ी और पशुपालन से जीवनयापन करने वाले बहुसंख्य आदिवासी परिवारों के लिए अन्य आधारभूत जरूरतों के साथ ही सिंचाई सुविधा की खास अहमियत है। इसी को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गांरटी योजना के अंतर्गत बांसवाड़ा जिले में उन सभी इलाकों में सिंचाई संसाधनों के विकास एवं विस्तार पर विशेष ध्यान दिया गया जो माही बजाज सागर परियोजना के सिंचित क्षेत्र से अलग हैं और जहां सिंचाई सुविधाओं को अभाव दशकों से खलता रहा है।

जिले में राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गांरटी योजना के तहत विभिन्न क्षेत्रों में बड़ी संख्या में नवीन जल संरचनाएं अस्तितव में आयी जो अब खेत-खलिहानों की समृद्वि का संगीत सुना रही हैं। इन्हीं में बागीदौरा पंचायत समिति के उम्मेदगढ़ी गांव में बनाएं गए दो एनिकटों ने लोगों को रोजगार देने के साथ ही पेयजल की और सिंचाई की समस्या पर काबू पाने में मदद दी है।

बाकिया नाला एनिकट: उम्मेदगढ़ी में बाकिया नाला पर राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गांरटी योजना में 4.53 लाख रुपये व्यय कर एनिकट बनाया गया है। लगभग 10 हजार 900 घन मीटर जल संग्रहण की क्षमता वाले इस एनिकट के बन जाने के बाद पहली बरसात के बाद दूर-दूर तक पसरी जलराशि देख क्षेत्र के ग्रामीणों के हर्ष का पार न रहा। उसके लिए बाकिया नाले के एनिकट ने समस्याओं भरे सारे पुराने बाकियात खत्म कर नई जिंदगी का सुकून दिया।

एनिकट ने यहां के मूक प्राणियों को भी राहत दी है। पहले इलाके में मवेशियों के लिए पीने के पानी की समस्या थी लेकिन बाकिया नाला एनिकट ने इसका समाधान कर दिया। नवीन जल संरचना के निर्माण ने बरसात के दिनों में भूमि के कटाव तथा उपजाऊ मिट्टी के बह जाने की समस्या पर भी लगाम लगा दी है।

भड़ाका नाला एनिकट: इसी प्रकार उम्मेदगढ़ी में ही भड़ाका नाला पर राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत 4.48 लाख की धनराशि व्यय कर एनिकट बनाया गया है। इस एनिकट की जल भराव क्षमता 9 हजार 500 घन मीटर है। इससे पास के 5 निजी कुओं के जल स्तर में बढ़ोतरी के साथ 10 काश्तकारों ने अपनी 4.75 हैक्टेयर जमीन में इसके पानी का उपयोग किया। इससे उनके पुसल उत्पादन में करीब 12 क्विं टल गेहूं एवं चने की वृद्वि हुई।

एनिकट के बन जाने से पहाड़ी पानी के बहकर चले जाने और मृदा पर रोक लगी है और मवेशियों के लिए पानी का बेहतर स्त्रोत विकसित हुआ है। उम्मेदगढ़ी गांव में बने ये दोनों एनिकट क्षेत्र में हरियाली और खुशहाली लाने की क्षेत्रीय ग्रामीणों की उम्मीदों पर खरे उतर कर ग्राम्य जीवन में उल्लास भर रहे हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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