प्रदूषण का गर्भवती महिलाओं पर बुरा असर

नई दिल्ली, 2 अप्रैलः जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्रों का जलस्तर बढ़ने से भारत के तटीय इलाकों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य पर सर्वाधिक प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। यह कहना है, जलवायु परिवर्तन पर गठित हुए 'इंटर-गवर्मेंटल पैनल' (आईपीसीसी) के वैज्ञानिक एंथनी जे. मैकमाईकल का।

मैकमाईकल ने कहा, " जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्रों का जलस्तर बढ़ रहा है। आने वाले कुछ समय में भारत में इसके बेहद बुरे प्रभाव देखने को मिलेंगे। " उन्होंने कहा कि यहां शुद्ध पेयजल की कमी के कारण लोगों को खारे पानी पर ही निर्भर रहना पड़ेगा।

मैकमाईकल ने बताया कि शरीर में नमक की मात्रा बढ़ने से महिलाओं में हृदय रोगों और गर्भावस्था के आखिरी तीन माह में उच्च रक्तचाप से पीड़ित होने का खतरा पैदा हो सकता है।

उन्होंने बताया कि इस कारण नवजात शिशु के स्वास्थ्य पर भी विपरीत असर पड़ेगा। मैकमाईकल बीते सप्ताह दिल्ली में आयोजित 'पब्लिक हैल्थ फाउंडेशन आफ इंडिया' (पीएचएफआई) के स्थापना दिवस के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में भाग लेने आए थे।

आईपीसीसी द्वारा जारी रिपोर्ट के मुताबिक भारत में समुद्रों का जलस्तर 15 से 38 सेंटीमीटर बढ़ने के कारण हजारों लोगों को विस्थापित भी होना पड़ेगा।

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