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अब साकार हो सकेगा मेरा टीचर बनने का सपना

By Staff
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    जयपुर, 2 अप्रैल (आईएएनएस)। अब तक तो ऐसा लगता था कि पापा के नहीं होने तथा बड़े परिवार के बोझ के कारण मेरा टीचर बनने का सपना अधूरा रह जाएगा परंतु अब यदि मुझे प्रतिमाह दो हजार रुपये की छात्रवृत्ति मिलेगी तो टीचर बनकर दिखाऊंगी। यह कहना है राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय माण्डव में कक्षा ग्यारहवीं में अध्ययनरत रंजना डोडियार का।

    स्थानीय जिला कलेक्ट्रेट में रंजना को वर्ष 2007 की 10वीं बोर्ड परीक्षा में प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण व आर्थिक दृष्टि से कमजोर परिवार से सम्बद्ध होने के कारण बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा अपने शताब्दी वर्ष में अंगीकृत की गई समग्र एकीकृत विकास परियोजना के तहत गत छ: माह की छात्रवृत्ति राशि के रूप में जिला कलक्टर नीरज के. पवन के हाथों 12 हजार रुपयों के चैक प्रदान किया गया।

    जिला प्रशासन द्वारा जनजाति अंचल में बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए प्रस्तावित इस योजना के तहत बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा जनजाति वर्ग की 10 छात्राओं को एक लाख बीस हजार रुपयों की छात्रवृत्ति राशि प्रदान की गई।

    रंजना ने बताया कि उसके पिताजी का बचपन में ही निधन हो गया था और उसके परिवार में चार बहनों व एक भाई के भरण-पोषण का पूरा भार उसकी मां पर ही है। मां ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के कार्यो पर जाती है और उसकी दिनभर की मेहनत से जो कुछ रुपये आते हैं, परिवार के खाने पर ही खर्च हो जाते हैं। ऐसे में स्कूल की पढ़ाई का खर्च उठाना संभव नहीं था और ऐसा लग रहा था कि पढ़ाई अब छूटे तब छूटे। परंतु अब लगता है कि वह खुद भी पढ़ सकेगी और अपने भाई बहनों के लिए भी सहारा बन सकेगी।

    इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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