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विदेश नहीं जाना चाहते आईआईएम टॉपर

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लखनऊ 1 अप्रैल: आध्यात्मिक क्षेत्र से लेकर विज्ञान तक भारतीयों ने अपनी प्रतिभा का परचम पूरे विश्व में लहराया है हालांकि दुर्भाग्य की बात यह भी है कि पर्याप्त संसाधनों के अभाव में यह मेधा कई बार विदेशों की भी होकर रह जाती है। मगर बदलते समय के साथ अब प्रतिभावान छात्रों की सोच भी बदल रही है। वह अपने ज्ञान का उपयोग अपनी ही मातृभूमि के लिए करना चाहते हैं।

अब उनके लिए पैसा नहीं बल्कि अपने देश का विकास और अपनों का प्यार प्राथमिकता पर है। इन्हीं में शामिल है इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएम) के वे छात्र जिन्होंने विदेश जाने के बजाय देश में ही अपनी योग्यता के इस्तेमाल का फैसला किया है। यही वजह है इन्होंने विदेश से मिल रहे नौकरी के अवसर को ठुकराने में क्षण भर का भी समय नहीं लिया।

हाल में ही आईआईएम-एल की मेधा सूची में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले गौरव अग्रवाल आम आदमी से जुड़कर देश की उन्नति में सहयोग देना चाहता है। यही वजह है कि उसने विदेश तो दूर की बात कापरेरेट जगत में ही नहीं आने का फैसला लिया है। उसने आईएएनएस से खास बातचीत में कहा, "मैं अपनी प्रतिभा का इस्तेमाल अपने देश हित में ही करुंगा। आम आदमी से जुड़कर उनकी समस्या कर समाधान करुंगा इसलिए अब प्रशासनिक सेवा में जाने का मन बनाया है।"

दूसरा स्थान पाने वाली सुरभि खुटेटा ने भी विदेश जाने के पेशकश को ठुकरा चुकी हैं। उन्होंने मैकेन्जी का प्रस्ताव तो चुना लेकिन अपनी शतरें पर लिहाजा उन्हें लंदन, दुबई, सिंगापुर, मुंबई और दिल्ली में से चयन का विकल्प दिया गया। जिसमें उन्होंने दिल्ली को चुना। सामाजिक कार्य में रुचि रखने वाली सुरभि भविष्य में ऐसे कार्यक्रमों से जुड़कर अपने ही देश के लिए कुछ करने कर जज्बा रखती हैं। उन्होंने कहा, "मेरे देश से मुझे पहचान मिली है। अब इसकी सेवा की बारी हमारी है।" तीसरे स्थान पर रहे हिमांशु सरीन के विचार भी इन्हीं लोगों से मिलते-जुलते हैं।

गौरतलब है कि पिछले साल आईआईएम-एल में 280 छात्रों के लिये 28 विदेशी कंपनियों के प्रस्ताव आये थे। वहीं इस साल 256 छात्रों को 32 विदेशी कंपनियों ने ऑफर दिया था लेकिन ज्यादातर छात्रों ने अपने ही देश में रहने का फैसला लिया। इन छात्रों में एक ट्रेंड और जोर पकड़ रहा है कि वह नौकरी के बजाय अपना व्यवसाय शुरू करने में ज्यादा रुचि ले रहें हैं।

इन छात्रों की इच्छा है कि वह अपनी प्रतिभा का मन मुताबिक उपयोग करें और दूसरों को भी रोजगार दे सकें। आईआईएम के सूत्र बताते हैं कि अब छात्र कृषि जैसे क्ष्ेात्र में जाने के लिए आतुर हैं जहां पहले ये जाना स्वीकार नहीं करते थे।

आईआईएम-एल बोर्ड आफ गवर्नर्स के चेयरमैन डा. जे. जे. ईरानी इसे भविष्य के लिए बेहतर मानते हैं। उन्होंने कहा, "हम आधी सदी के भीतर दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति बनने जा रहे हैं। हमारे पास दूसरी ब्रेन पावर है जो इस वक्त सर्वश्रेश्ठ है। विज्ञान, चिकित्सा और साफटवेयर के क्षेत्र में भारतीय अपना लोहा मनवा चुके हैं। ये फक्र की बात है।"

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