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तिब्बतियों से सख्ती के लिए नेपाल की आलोचना

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Tibet
काठमांडू 1 अप्रैल: तिब्बती शरणार्थियों के प्रदर्शनों को लेकर कुछ ज्यादा ही कड़ाई बरतने के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नेपाल की आलोचना हो रही है।

उधर नेपाल ने इस आलोचना की परवाह न करते हुए अपरोक्ष रूप से चीन की तिब्बत नीति का समर्थन करते हुए कहा कि बीजिंग ओलंपिक में वह देश के सर्वश्रेष्ठ एथलीटों को भेजेगा।

गौरतलब है कि हाल ही की घटनाओं के बाद कई अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने नेपाली प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोईराला से कहा है कि तिब्बती शरणार्थियों के साथ सख्ती बरत कर देश की छवि को धूमिल न करें।

'एमनेस्टी इंटरनेशनल' और 'इंटरनेशनल राइट्स वाच' (एचआरडब्ल्यू) नामक गैर सरकारी संगठनों ने सबसे पहले आधिकारिक रूप से नेपाल के प्रति विरोध दर्ज करवाया है।

इन संगठनों के अनुसार शांति पूर्वक प्रदर्शन करने वाले तिब्बती शरणार्थियों के साथ नेपाल में र्दुव्‍यव्यवहार हो रहा है।

इन दोनों संगठनों ने मंगलवार को प्रधानमंत्री को कोईराला के एक संयुक्त पत्र भेजा। पत्र में में नेपाली पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों के विरूद्ध की गई कार्रवाई पर रोष व्यक्त किया गया है।

संगठनों ने कहा, "प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी को लेकर पुलिस ने कानूनी रूप से उचित कदम नहीं उठाया है। पुलिस ने 1500 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया।"

'एमनेस्टी इंटरनेशनल' की एशिया क्षेत्र की कार्यकारी निदेशक कैथरीन बेबर और 'एशिया एडवोकेसी' की निदेशक सोफिया रिचर्डसन ने कहा कि गिरफ्तारी के दौरान प्रदर्शनकारियों के साथ होने वाले व्यवहारों को लेकर संगठन चिंतित है।

गौरतलब है कि 10 मार्च से विश्व के विभिन्न हिस्सों में तिब्बतियों द्वारा चीन की तिब्बत नीति के विरूद्ध प्रदर्शन चल रहे हैं। गैर सरकारी सूत्रों के अनुसार तिब्बत की राजधानी ल्हासा में चीनी सेना द्वारा की गई कार्रवाई में बड़ी तादाद में तिब्बती मारे गए हैं।

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