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बैंकाक में जलवायु परिवर्तन सम्मेलन

By Staff
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Climate Change
बैंकाक 31 मार्च: भविष्य में भीषण प्राकृतिक आपदाओं और भू संसाधनों की क्षति का कारण बन रहे जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग के दुष्प्रभावों से निबटने के लिए अपनी कोशिशें दोबारा तेज करते हुए दुनिया भर के लगभग एक हजार पर्यावरण विशेषज्ञ और अधिकारी सोमवार को थाईलैंड की राजधानी बैंकाक में इकठ्ठा हो रहे हैं.

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के तत्त्वाधान में 31 मार्च से4 अप्रैल तक आयोजित इस सम्मेलन का मुख्य लक्ष्य वर्ष 2012 में समाप्त हो रही क्योटो संधि के स्थान पर वर्ष 2009 तक एक ऐसी प्रभावी व्यवस्था का खाका तैयार करना है जो विकासशील देशों के साथ विकसित देशों को भी पर्यावरण प्रदूषण के लिए जिम्मेदार ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती के लिए बाध्य कर सके.

संयुक्त राष्ट्र जलावायु परिवर्तन सचिवालय के प्रमुख यूवो डे बोअर ने इस मौके पर कहा हमारे समक्ष सबसे बडी चुनौती एक ऐसी व्यवस्था बनाने की है जो आने वाले 10-15 वषो के भीतर ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को चरणबद्ध तरीके से कम करते हुए वर्ष 2050 तक इसकी सीमा में खासी कटौती करने में सहायक साबित हो. सम्मेलन में हिस्सा ले रहे पर्यावरण विशेषज्ञ चाहते हैं कि इसबार ऐसी किसी व्यवस्था पर सहमति बने जिससे गरीब के साथ अमीर मुल्कों पर भी ग्रीन हाउस उत्सर्जन सीमा को लेकर कडे उपबंध लागू हो सकें. हालांकि उनका मानना है कि इन मुद्दें पर बातचीत काफी तल्खी भरी और सख्त हो सकती है.

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