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जलवायु परिवर्तन पर यूरोपीय संघ के साथ है भारत

By Staff
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    ब्रसेल्स, 31 मार्च (आईएएनएस)। जलवायु परिवर्तन के खतरे को रोकने के लिए ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन कम करने के यूरोपीय देशों के प्रयास में भारत 'ऊर्जा व्यापार व्यवस्था' (ईटीएस) द्वारा सहयोग दे रहा है।

    भारत के पूर्व पर्यावरण सचिव प्रदीप्तो घोष ने ईयू एशिया न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि," भारत में स्वच्छ विकास तंत्र (सीएमडी) की संख्या सबसे अधिक है। भारत यूरोपीय देशों के क्योटो संधि के अनुसार कार्बनडाईआक्साइड का ऊत्सर्जन घटाने के लक्ष्य को पाने में सहायता कर रहा है।"

    भारत में स्वच्छ विकास तंत्र (सीएमडी) क्योटो समझौते के अन्तर्गत एक प्रावधान है। इसके अनुसार विकसित देशों को यह अनुमति है कि वह ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन कम करने के लिए अपने देश में मंहगें संयंत्र जगाने के स्थान पर विकासशील देशों की परियोजनाओं में को आर्थिक सहायता दे सकते हैं।

    घोष ने कहा कि वह यूरोपीय संघ के 2020 तक कार्बनडाई आक्साइड के उत्सर्जन में 20 प्रतिशत की कमी करने की घोषणा का स्वागत करते हैं।

    घोष संयुक्त राष्ट्र के कई संगठनों में सलाहकार रह चुके हैं। वह भारतीय प्रधानमंत्री की जलवायु परिवर्तन कमेटी के सदस्य भी हैं।

    क्योटो समझौता 1997 में किया गया था। इसमें धरती का तापमान बढ़ाने वाली गैसों का उत्सर्जन कम करने पर सहमति बनी थी।

    विकसित देशों ने 2050 तक ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में 50 प्रतिशत की कमी करने का लक्ष्य रखा है।

    घोष ने पश्चिमी देशों के इस आरोप को मानने से इंकार कर दिया कि तेल की बढ़ती हुई कीमतों के पीछे भारत और चीन में खपत का बढ़ना है। उन्होंने कहा कि यूरोपीय देशों में प्रति व्यक्ति ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन की तुलना में भारत केवल दसवां हिस्सा ही ऊउत्सर्जित करता है।

    अमेरिका प्रति व्यक्ति ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन का केवल 20वां भाग ही भारत उत्सर्जित करता है।

    घोष ने जोर देकर कहा कि पिछल्ले कुछ वर्षो में भारत की तुलना में विकसित देशों खासकर अमेरिका में तेल की मांग बहुत अधिक बढ़ी है।

    इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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