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तिब्बत की राजधानी में चीनी घेराबंदी

By Staff
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पेईचिंग, 30 मार्चः चीनी सुरक्षा बलों तिब्बत की राजधानी ल्हासा को चारों तरफ से घेर लिया है. इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया जताते हुए यूरोपीय संघ ने चीन से आग्रह किया है कि वह तिब्बत में आजादी समथकों के दमन को तत्काल बंद करे.

संघ ने यह अपेक्षा की है कि चीन तिब्बती सांस्कृतिक एवं धार्मिक अधिकारों को लेकर तिब्बती नेतृत्व से बातचीत आरंभ करे. लंदन स्थित अंतरराष्ट्रीय तिब्बत अभियान (आईसीटी) ने बताया कि सुरक्षा बलों ने जोखांग और रामोचे मठों को भी घेर लिया है और सारे इलाके में मकान तथा दुकानें सब बंद हैं.

उधर स्लोवानिया के ब्रडो में यूरोपीय संघ के विदेशमंत्रियों की बैठक में काफी विचार-विमर्श के बाद सभी लोग एकमत हो सके. ब्रिटेन के विदेशमंत्री डेविड मिलिबैण्ड ने कहा कि 27 सदस्यीय ईयू चाहता है कि चीन सरकार दलाई लामा से बात करे क्योंकि वे हिंसा की निंदा करते रहे हैं.

ल्हासा में चीन सरकार द्वारा प्रायोजित यात्रा के तहत विदेशी राजनयिकों के दल ने दौरा किया. इसी बीच ल्हासा में दलाई लामा के एक प्रवक्ता तेन्जिन तक्लहा ने बताया कि बड़ी संख्या में विदेशी राजनयिक यहाँ आए थे. तक्लहा ने बताया कि शहर को भारी संख्या में सैनिकों एवं पुलिस जवानों ने घेर रखा है.

शहर में ताजा विरोध प्रदर्शनों के बारे में पूछे जाने पर संगठन की प्रवक्ता केट सौण्डर्स ने कहा कि इस स्थिति में आखिर किस तरह का विरोध प्रदर्शन हो सकता है. उन्होंने कहा कि संभवत: राजनयिकों की यात्रा के मद्देनजर ये इंतजाम किए गए हैं. सरकार शायद विदेशी पत्रकारों की यात्रा के दौरान हुई घटनाओं को ध्यान में रखते हुए इतनी सतर्कता बरत रही है.

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