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माकपा के काडर आधुनिक जीवन शैली की चपेट में

By Staff
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    कोयंबटूर, 30 मार्च (आईएएनएस)। मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा ) ने अपने पूर्णकालिक कार्यकर्ताओं की घटती संख्या पर चिंता व्यक्त करते हुए इसके लिए आधुनिक जीवन शैली और सांप्रदायिक राजनीति को जिम्मेदार ठहराया है।

    कोयंबटूर, 30 मार्च (आईएएनएस)। मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा ) ने अपने पूर्णकालिक कार्यकर्ताओं की घटती संख्या पर चिंता व्यक्त करते हुए इसके लिए आधुनिक जीवन शैली और सांप्रदायिक राजनीति को जिम्मेदार ठहराया है।

    माकपा की आज आरंभ हुई दो दिवसीय 19 वीं पार्टी कांग्रेस में पार्टी को प्रभावित कर रही इस गंभीर चुनौती पर आत्ममंथन की संभावना है।

    माकपा सूत्रों के अनुसार पार्टी के पूर्णकालिक कार्यकर्ताओं की संख्या में जहां गिरावट आ रही है वहीं स्थायी सदस्यों की संख्या में 7.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

    जब 1964 में पार्टी का गठन हुआ था तब उसकी सदस्य संख्या 118,683 थी, 2005 में माकपा सदस्यों की संख्या 900,000 थी। जो अब बढ़कर 982,000 हो गई है।

    पार्टी नेताओं का कहना है कि भारत में भूमंडलीकरण के बाद आधुनिक जीवन शैली के प्रभाव ने युवाओं को पूर्णकालिक कार्यकर्ता के साधारण और अनुशासित जीवन से दूर करने में योगदान दिया है।

    एक माकपा नेता ने स्वीकार किया कि पूर्णकालिक कार्यकर्ताओं का संकट उन राज्यों में अधिक है जहीं पार्टी सत्ता से बाहर है।

    वामदलों की सत्ता वाले राज्यों में भी पार्टी पूर्णकालिक कार्यकर्ताओं को रोक पाने में असफल रही है। बंगाल में जहां पार्टी पिछले तीन दशकों से सत्ता में है, पूर्णकालिक कार्यकर्ताओं में गिरावट की दर 3.5 प्रतिशत है। केरल में यह दर 10 प्रतिशत है।

    संसद में 43 सदस्यों वाली पार्टी को पूर्णकालिक कार्यकर्ताओं की कमी के कारण कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन पार्टी नेताओं का कहना है कि सदस्यता के प्रश्न पर समझौता नहीं किया जा सकता है। इससे कार्यकर्ता आधारित पार्टी की छवि प्रभावित हो सकती है।

    इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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