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उप्र में आलू किसान परेशान, बिचौलियों की चांदी

By Staff
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    वाराणसी, 30 मार्च (आईएएनएस)। पूर्वाचल में इस साल आलू के रिकार्ड उत्पादन से किसानों के चेहरों पर थोड़े दिनों के लिए मुस्कराहट तो आई थी लेकिन बिचौलियों की वजह से वह मुस्कराहट कुछ ही दिनों में काफूर हो गई।

    कोल्ड स्टारों में कम जगह होने के कारण किसानों को भंडारण के लिए अपना आलू बिचौलियों को ही औने पौने दामों में बेच देना पड़ रहा है। आलम यह है कि शीत गृहों के सामने किसानों को कई दिनों तक लाइन लगा कर खड़ा रहना पड़ रहा है।

    पूर्वाचल में लगभग 30 प्रतिशत शीत गृहों के कारगर नहीं होने के कारण यहां के किसानों के सामने भंडारण की विकट समस्या खड़ी हो गई है। भोले-भाले किसानों के सामने इस तरह की कृत्रिम समस्या पैदा होने से थोक में आलू की बिक्री 250 से 300 रुपये प्रति 100 किलो और खुदरा में 300 से 400 रुपये प्रति 100 किलो तक आ गई है।

    पूरे पूर्वाचल के शीत गृहों पर यदि नजर डाली जाय तो मऊ जनपद में पांच शीत गृह हैं लेकिन इनमें से दो कारगर नहीं हैं, जौनपुर में कुल 23 कोल्ड स्टोर हैं लेकिन मात्र 20 ही चालू हालत में है। आजमगढ़ में स्थिति और भी गंभीर है, क्योंकि इस साल जिले में आलू की पैदावार लगभग एक लाख 44 हजार टन हुई है लेकिन भंडारण क्षमता मात्र 21 हजार 499 टन है।

    ऐसे में बिचौलियों के बर्चस्व और शोषण के डर से किसानों की नींद उड़ी हुई है। छोटे जिले गाजीपुर में कुल 19 शीत गृह है लेकिन इस समय 12 ही काम कर रहे हैं। भदोहीं क्षेत्र में ऐसी समस्या आई ही नहीं है क्योंकि यहां आलू उत्पादन प्र्याप्त मात्रा में हुआ ही नहीं है।

    किसानों की समस्या की गंभीरता बताते हुए वाराणसी के जिला उद्यान अधिकारी लाल जी पाठक का कहना है कि समस्या शीत गृहों की खराबी के कारण तो आई ही है लेकिन आलू का रिकार्ड उत्पादन भी इस समस्या का कारण बना हुआ है। आंकड़ें बताते हैं कि जौनपुर में 30 लाख 38 हजार टन उत्पादन के मुकाबले अभी तक 30 लाख 10 हजार टन आलू की खुदाई हो चुकी है, जबकि अभी 30 प्रतिशत खुदाई बाकी है।

    आजमगढ़ में एक लाख 44 हजार टन का रिकार्ड उत्पादन हुआ है जबकि वहां भण्डारण की क्षमता मात्र साढ़े इक्कीस हजार टन ही है। मऊ जनपद में भंडारण की क्षमता से इस साल आलू का उत्पादन दोगुना हुआ है। इसी तरह गाजीपुर में डेढ़ लाख टन के अनुमानित उत्पादन लक्ष्य के की तुलना में ढाई लाख टन से भी ज्यादा आलू का उत्पादन हुआ है।

    ऐसे में किसानों के आलू पर साहूकार और बिचौलियों की गिद्ध दृष्टि लगी हुई है और किसान मजबूर होकन अपना शोषण होते चुप चाप देख रहे हैं। सूबे की सरकार बुंदेलखंड और सोनभद्र के किसानों की हालत पर आंसू तो बहाती है लेकिन वर्तमान समय में आलू की इस लूट खसोट पर मौन साधे हुए है। शायद ऐसा इसलिए है क्योंकि मायावती जी को पार्को की मरम्मत से फुर्सत जो नहीं मिलती।

    इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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