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एशियाई देशों में चावल पर मचा बवाल

By Staff
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    नई दिल्ली, 28 मार्च (आईएएनएस)। चावल की आसमान छूती कीमतों के मद्देनजर पैदा हुए आपूर्ति संकट को हल करने की दिशा में एशियाई देशों की सरकारों द्वारा अपनाए जा रहे उपायों के सिलसिले में भारत सरकार द्वारा भी गुरुवार को गैर बासमती चावल निर्यात पर दी जा रही विशेष रियायत को वापस लेने का फैसला किया गया।

    नई दिल्ली, 28 मार्च (आईएएनएस)। चावल की आसमान छूती कीमतों के मद्देनजर पैदा हुए आपूर्ति संकट को हल करने की दिशा में एशियाई देशों की सरकारों द्वारा अपनाए जा रहे उपायों के सिलसिले में भारत सरकार द्वारा भी गुरुवार को गैर बासमती चावल निर्यात पर दी जा रही विशेष रियायत को वापस लेने का फैसला किया गया।

    चावल निर्यात को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार द्वारा पूर्व में इस तरह की रियायत का प्रावधान किया गया था।

    साथ ही सरकार ने गुरुवार को गैर बासमती चावल के न्यूनतम निर्यात मूल्य को बढ़ाकर एक हजार डालर प्रति टन फ्री आन बोर्ड कर दिया। इससे पहले गैर बासमती चावल का निर्यात मूल्य 650 डालर प्रति टन था। सरकार द्वारा मार्च महीने के अंदर लगातार दूसरी बार गैर बासमती चावल के निर्यात मूल्य में वृद्धि की गई है।

    सरकारी बयान के मुताबिक गैर बासमती के साथ -साथ बासमती चावल के मौजूदा न्यूनतम निर्यात मूल्य 900 डालर प्रति टन को बढ़ाकर 1,100 डालर प्रति टन कर दिया गया है। निर्यात से संबंधित सरकार के इन कदमों का उद्देश्य चावल की घरेलू आपूर्ति को सुनिश्चित करना है।

    इससे पहले सरकार ने मार्च 2008 के प्रथम पखवाड़े में गैर बासमती चावल का न्यूनतम निर्यात मूल्य 500 डालर प्रति टन से बढ़ाकर 650 डालर प्रति टन कर दिया था।

    चावल की वैश्विक कीमतों में वृद्धि और आपूर्ति संकट को देखते हुए वियतनाम सरकार ने भी बुधवार को चावल के निर्यात पर नियंत्रण से संबंधित उपायों की घोषणा की। साथ ही कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुन सेन ने भी उसी दिन देश से चावल निर्यात को प्रतिबंधित करने का आदेश दिया। गौरतलब है कि वियतनाम, भारत और कंबोडिया चावल के प्रमुख निर्यातक देश हैं।

    इस बीच पिछले दो महीनों में चावल की कीमतों में 50 फीसदी का इजाफा हुआ है। वर्ष 2004 की तुलना में देखें तो चावल की कीमत में दोगुना वृद्धि हुई है। गौरतलब है कि जनवरी 2008 की समाप्ति पर अंतर्राष्ट्रीय बाजार में चावल की कीमत पिछले 34 वर्षो के उच्चतम स्तर यानी 708 डालर प्रति टन तक पहुंच गई थी।

    बाजार समीक्षकों को अनुमान है कि चावल की कीमतों में आने वाले महीनों के दौरान और 40 फीसदी की तेजी आ सकती है।

    उधर, अमेरिकी कृषि विभाग ने अपनी रिपोर्ट में अनुमान लगाया है कि वर्ष 2007-08 के दौरान चावल का वैश्विक स्टाक घटकर 7.20 करोड़ टन रह सकता है। वर्ष 1983-84 के बाद चावल के वैश्विक स्टाक में यह सबसे बड़ी गिरावट है। वर्ष 2000-01 की तुलना में वर्ष 2007-08 के लिए चावल का अनुमानित वैश्विक स्टाक सिर्फ 50 फीसदी है।

    इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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