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कांग्रेस ने रिश्वत मामले में आयोग से शिकायत की

By Staff
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Madhya pradesh
भोपाल, 20 मार्चः कांग्रेस की मध्यप्रदेश इकाई ने राज्यसभा निर्वाचन में निर्दलीय प्रत्याशी के पक्ष में मतदान के लिए समाजवादी पार्टी के विधायक को उसकी ओर से रिश्वत की पेशकश किए जाने संबंधी आरोप को सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी सरकार का षडयंत्र बताते हुए निर्वाचन आयोग से शिकायत की है.

गौरतलब है कि समाजवादी पार्टी के विधायक किशोर समरीते ने मध्यप्रदेश से राज्यसभा की तीन सीटों के लिए हो रहे निर्वाचन में निर्दलीय कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार विवेक तन्खा के पक्ष में मतदान के लिए दस लाख रूपए की रिश्वत दिए जाने का आरोप लगाया है.

विपक्ष की नेता जमुना देवी ने यहां एक बयान में कहा है कि विधानसभा में सदस्य संख्या के मान से राज्यसभा की रिक्त हो रही तीन सीटों में से दो पर भाजपा की जीत तय है. तीसरी सीट पर जीत के लिए जरूरी बहुमत न होने के बावजूद भाजपा द्वारा प्रत्याशी मैदान में उतारने से यह बात साफ होती है कि वह खुद खरीद फरोख्त के लिए मैदान में उतरी है.

उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा सरकार ने इस बात का अहसास होने पर कि तीसरी सीट पर उसकी जीत तय नहीं है, निर्दलीय प्रत्याशी और कांग्रेस को बदनाम करने के लिए सुनियोजित तरीके से समाजवादी पार्टी के विधायक किशोर समरीते के माध्यम से यह षडयंत्र रचा.

जमुना देवी ने कहा कि समरीते के पास इस बात का कोई साक्ष्य नहीं है कि उन्हें पैसे किसने दिए. वह लगातार अपना बयान बदल रहे हैं. भाजपा के साथ समरीते की नजदीकियां पिछले कुछ दिनों से साफ तौर पर देखी जा रही थीं.

उन्होंने कहा कि प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए उनकी निर्वाचन आयोग से मांग है कि इस मामले की जांच किसी निष्पक्ष एजेंसी से कराई जाए. जमुना देवी ने शिकायत की प्रतिलिपि केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल को भी भेजी है.

इस मामले में विधायक किशोर समरीते को अनुशासनहीनता के आरोप में दल से निलंबित किया जा चुका है. सपा सूत्रों के अनुसार अनुशासनहीनता के आरोप में दल के शीर्ष नेतृत्व ने यह कार्रवाई की है. समरीते ने राज्यसभा निर्वाचन के लिए जारी पार्टी व्हिप के खिलाफ जाने की खुलेआम घोषणा की है.

पार्टी सूत्रों ने कहा कि निर्दलीय प्रत्याशी तन्खा के पक्ष में मतदान के लिए पार्टी की ओर से जारी व्हिप का उल्लंघन पाए जाने पर निष्कासन जैसी कडी कार्रवाई भी समरीते के खिलाफ हो सकती है.

समरीते ने न सिर्फ तन्खा के पक्ष में जारी पार्टी व्हिप को मानने से इंकार किया है बल्कि दल के नेताओं के बारे में अनुशासनहीनता के दायरे में आने वाली टिप्पणियां की है. समरीते ने यह आरोप लगाया है कि कांग्रेस के नेताओं ने उनसे संपर्क कर तन्खा के पक्ष में मतदान करने के लिए 25 लाख रूपए की रिश्वत देने की पेशकश की.

दस लाख रूपए की राशि कांग्रेस के एक पूर्व मंत्री उनके निवास पर भी छोड़ गए. सपा विधायक ने इस मामले की शिकायत निर्वाचन आयोग और पुलिस में की है.

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