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कांग्रेस प्रेसिडेंट ने पूरे किए 10 वर्ष

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Sonia Gandhi
नई दिल्ली, 14 मार्चः सोनिया गांधी ने कांग्रेस प्रेसिडेंट के रुप में पार्टी की कमान संभालते हुए आज 10 वर्ष पूरे कर लिए. एक शर्मीली इटालियन लड़की से लेकर राजीव गांधी की पत्नी, गांधी परिवार की बहू, एक मां और फिर क्रांग्रेस अध्यक्ष तक का सफर उन्होंने काफी समझदारी और हिम्मत के साथ पूरा किया.

सोनिया ने पार्टी की कमान तब संभाली जब देश के राजनैतिक परिप्रेक्ष्य में कांग्रेस की स्थिति चरमरा रही थी. खुद सोनिया भी तब हिंदी बोल नहीं पाती थीं और उनकी इस कमज़ोरी का विपक्षी दलों ने काफी मज़ाक भी उड़ाया, लेकिन सोनिया ने न केवल अच्छी हिन्दी बोलकर विपक्षियों का मुह बंद किया बल्कि पार्टी को जीवन दान भी दिया.

आज कांग्रेस एक बार फिर देश की सबसे बड़ी पार्टियों में एक है. कामयाबी के झंडे गाड़ने वाली सोनिया गांधी कांग्रेस के पिछले 120 सालों के इतिहास में पहली ऐसी शख्सियत हैं जिन्होंने लगातार दस साल तक पार्टी का सफलतापूर्वक संचालन किया. सोनिया गांधी की उपलब्धियों के बारे में हिन्दुस्तान टाइम्स के संपादक वीर संघवी ने कहा है कि ' सोनिया गांधी के कारण कांग्रेस ने एक बार फिर से मुसलमानों का विश्वास हासिल कर लिया है जो वह नरसिम्हा राव की सरकार के समय खो चुकी थी'.

सोनिया गांधी ने 1998 में सीताराम केसरी के बाद कांग्रेस अध्यक्ष का पद उस वक्त संभाला था जब भाजपा के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) केंद्र में सत्ता में था. राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार सोनिया का सबसे बड़ा योगदान ये रहा कि उन्होंने न केवल संकट के दिनों में पार्टी को एकजुट बनाये रखा बल्कि धीरे-धीरे उसे सत्तावापसी की राह पर भी वापस ला दिया.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में गुरुवार को कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्यों की एक बैठक हुई जिसमें एक प्रस्ताव पारित कर पार्टी में उनके योगदान की प्रशंसा की गई. कांग्रेस नेता प्रणव मुखर्जी ने कहा,'' हम पार्टी को नेतृत्व प्रदान करने के लिए उनका आभार व्यक्त करते हैं. ये कांग्रेस के 122 साल के इतिहास में ऐतिहासिक क्षण हैं.''

सोनिया ने मई, 2004 में हुए लोकसभा चुनावों के पहले ग़ैर भाजपा दलों को एक मंच पर लाकर एक तरह से यह सुनिश्चित कर दिया कि एनडीए सत्ता में वापस न आए. सोनिया गांधी को कड़े विरोध का सामना भी करना पड़ा है. विदेशी मूल के मुद्दे को लेकर उन्हें विरोधियों की कटु आलोचना झेलनी पड़ी है. साथ ही मेनका गांधी जैसे परिवार के अन्य सदस्यों की चुनौती का भी सामना करना पड़ा है.

उन्होंने मई, 2004 में लोक सभा चुनाव के बाद प्रधानमंत्री का पद स्वीकार न कर काफ़ी लोकप्रियता अर्जित की.लाभ के पद को लेकर उठे विवाद के बाद सोनिया गांधी ने अपनी रायबरेली सीट से इस्तीफ़ा दे दिया था और वो वहां से फिर चुनाव जीतीं.कांग्रेस अध्यक्ष होने के साथ-साथ सोनिया राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (यूपीए) की भी अध्यक्ष हैं और उन्होंने यह सुनिश्चित किया है कि विभिन्न दबावों के बावजूद गठबंधन ठीक तरह से चलता रहे.

ये बात इसलिए भी अहम है क्योंकि कांग्रेस ने पहली बार अन्य दलों के साथ मिलकर केंद्र में गठबंधन सरकार बनाई है.

इस महत्वपूर्ण भूमिका के निर्वाहन के साथ ही निजी जिन्दगी में भी वो एक मां और नानी के भूमिका बखूबी निभा रही है. उम्र के 62वें पड़ाव पर पहुंच चुकी सोनिया आज भी ऐसे लोगों के लिए आदर्श है, जो यहां तक पहुंचते ही सेवा निवृत हो जाते है सोनिया गांधी इस उम्र में भी अगर इतनी स्फूर्ति से भरी हैं तो उसका एक कारण योग भी है वह अपने दिन की शुरूआत सुबह छह बजे योग के साथ करती हैं और दिनभर का कामकाज आधी रात को जाकर खत्म होता है.

अपने दिन भर के कामकाज के बीच चुस्ती-स्फूर्ति बनाए रखने के लिए सोनिया कड़क कॉफी पीती .हैं उन्हें कैपीचीनो कॉपी पीना बेहद पसंद है.देश के हालेत व रोज़मर्रा की खबरों से अवगत रहने के लिए सोनिया न केवल नौशनल बल्कि कई क्षेत्रीय अखबार भी पढ़ती हैं. एक आम भारतीय महिला की तरह सोनिया गांधी ने अपने कपड़ों की अलमारी में अभी भी वह गुलाबी रंग की साड़ी को सहेजे रखा है, जिसे उन्होंने अपनी शादी में पहना था.

यह उन्ही साड़ियों में से एक है जिन्हें जवाहर लाल नेहरू ने अपने जेल के दिनों में काता था. अब उनके कपड़ों का चयन उनकी बेटी प्रियंका गांधी ही करती हैं. सोनिया अपनी तय तारीखों को लेकर बेहद पाबंद है.अगर आप उनके दोस्त है तो याद रखें कि सोनिया अपने दोस्तों को शुभ संदेश और बधाईयां देना कभी नहीं भूलती.

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