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माकपा मामले पर लोकसभा स्थगित

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Parliament
नई दिल्ली, 11 मार्चः वामपंथी दलों और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सदस्यों ने आज राज्यसभा में दूसरे दिन भी एक दूसरे के कार्यकर्ताओं और कार्यालयों को हिंसा का निशाना बनाए जाने के आरोप लगाये और भारी शोरगुल के बीच सदन की कार्यवाही आज दूसरी बार अपराह्न डेढ बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई.

इस मुद्दे को लेकर हुई तीखी नोकोक और शोरशराबे के बीच एक नौबत ऐसी भी आयी जब पीठासीन उपसभापति वाम दलों के सदस्यों को फटकारते हुए कहा कि सदन मुझे चलाना है आपको नहीं. आप हमेशा समस्या क्यों पैदा करते हैं.

राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान यह मामला मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की वृंदा करात ने उठाया. उनका आरोप था कि दिल्ली में माकपा मुख्यालय पर हमले को भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेता जायज ठहरा रहे हैं और अपने कार्यकर्ताओं को हिंसा के लिए उकसा रहे हैं.

भाजपा के रूद्रमणि पाणि और विनय कटियार ने इसका जोरदार प्रतिवाद किया. इसके बाद पीठासीन उपसभापति पी जे कुरियन ने भाजपा के एम वेंकैया नायडू को बोलने का मौका दिया लेकिन श्रीमती करात उन्हें बोलने नहीं देना चाहतीं थीं. उन्होंने कहा कि जब नायडू ने नोटिस नहीं दिया है तो उन्हें अपनी बात रखने की इजाजत कैसे दी जा सकती है.

इससे पहले आज बारह बजे जैसे ही शून्य काल शुरु हुआ वाम दलों एवं भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के सदस्य इसी सवाल पर आमने-सामने तन गये. आचार्य कुछ राज्यों में कानून एवं व्यवस्था का मुद्दा उठाना चाहते थे. जिसपर चटर्जी की स्पष्ट राय थी कि वह राज्यों के क्षेत्राधीन मुद्दों पर सदन में चर्चा की इजाजत नहीं दे सकते.

आचार्य ने अपनी बात माकपा मुख्यालय पर रविवार को भाजपा संघ के हमले से प्रारंभ की और तुरंत भाजपा तथा राजग के सदस्य अपनी-अपनी सीटों पर खड़े होकर इसका विरोध करने लगे.

शोर गुल हंगामे में आचार्य की टिप्पणी गुम होते दुख वामपंथी सदस्य भी खड़े हो गए और गड़बड़ी की आशंका भांप कर अध्यक्ष ने कार्यवाही साढ़े बारह बजे तक के लिए स्थगित कर दी.

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