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फिर मुख्यमंत्री बने माणिक सरकार

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manik sarkar
अगरतला, 11 मार्चः एक राजनेता, भद्र पुरूष और साफ-सुथरी छवि वाले मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) नेता माणिक सरकार ने आज त्रिपुरा के मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की.

सरकार विरोधी लहर और चुनाव पूर्व भविष्यवाणियों को धता बताते हुए माकपा नीत वाम मोर्चे ने त्रिपुरा की दसवीं विधानसभा के चुनावों में लोगों का जबर्दस्त समर्थन हासिल किया.

22 जनवरी 1949 को जन्मे माणिक सरकार ने वर्ष 1967 में खाद्य आंदोलन से राजनीति की शुरूआत की. वह वर्ष 1968 में माकपा के सदस्य बने, बाद में वह एम बी बी कालेज छात्र संघ चुनावों में महासचिव चुने गये.

कोलकाता विश्वविद्यालय से स्नातक तक की शिक्षा ग्रहण करने के बाद सरकार वर्ष 1972 में माकपा की राज्य समिति के सदस्य चुने गये. वह पार्टी की केन्द्रीय समिति के वर्ष 1985 में सदस्य बनाये गये.

सरकार वर्ष 1981 में उपचुनाव जीतकर राज्य विधानसभा में पहुंचे थे. मार्च 1998 में धानपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीते और तभी से वह राज्य के मुख्यमंत्री हैं. अपने सरल और विनम्र व्यवहार की वजह से सरकार की छवि लोगों के बीच सज्जन पुरूष के रूप में है.

चुनाव आयोग के रिकार्ड के अनुसार सरकार देश के सबसे कम बैंक बैलेंस वाले मुख्यमंत्री हैं. निर्वाचन अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत सम्पत्ति ब्यौरे के अनुसार उनके खाते में मात्र 13920 रूपये हैं.

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