जारवा के इलाकों में पयर्टकों का प्रवेश बंद

कल यहां जारी आधिकारिक बयान के अनुसार इस आदेश का उल्लंघन करने वाले आपरेटरों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जायेगी. बयान में कहा गया कि यह जनजाति क्षेत्र केन्द्र शासित प्रदेश के प्रोटेक्श्न आफ एबोआरिजिनल ट्राइब्स रेगुलेशन एक्ट (1956) के अतंगर्त आते हैं.
इस सबसे पुरानी जनजाति को किसी भी कीमत पर पर्यटकों का आकर्षण का केन्द्र नही बनाया जा सकता. बयान में यह भी कहा गया कि प्रशासन ने पहले भी इन क्षेत्रों में लोगों का प्रवेश निषेध किया था.
आपरेटरों को बताया गया है कि 340 किलोमीटर लंबे अंडमान ट्रंक रोड (एटीआर) पर पर्यटकों को ले जाते समय वाहनों को रोका नहीं जाये और न ही जारवा जनजाति के लोगों को अपने वाहन में बैठाया जाये. उन्हें यह भी कहा गया कि वे यह भी ध्यान रखे कि न तो जारवा जनजाति के फोटो लिये जाये और न ही उनकी वीडियोग्राफी की जाये.
इस बीच अंडमान निकोबार क्षेत्रीय कांग्रेस समिति के मुख्य प्रवक्ता के गणेशन ने कहा कि इस तरह के नोटिस जारी करने का कोई मतलब नहीं है, क्योंकि यह सर्वविदित है कि प्रतिदिन जारवा क्षेत्रों में पर्यटकों को घुमाया जाता है.
गणेशन ने कहा कि आधिकारिक तौर पर यह दिखाया जाता है कि पर्यटकों को एटीआर होकर बारातंत द्वीप की सैर कराई जाती है. जबकि सच्चाई यह है कि कानून की धज्जियां उड़ाते हुये निजी बसों एवं वैनों से 550 रुपये के टिकट पर हर रोज करीब पांच सौ से अधिक पर्यटकों को जंगल में रहने वाले इन जनजातियों को दिखाया जाता है. उन्होंने कहा कि एटीआर जारवा आरक्षित क्षेत्र से होकर गुजरता है.


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