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रेल परियोजनाओं के लिये पांच साल में निजी क्षेत्र से एक लाख करोड

By Staff
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नयी दिल्ली. 26 फरवरी.वार्ता. देश के महानगरीय रेल स्टेशनों को आधुनिक बनाने. रेल इंजन और डिब्बे बनाने के कारखाने लगाने में रेलवे अगले पांच साल में सरकारी और निजी क्षेत्र की भागीदारी .पीपीपी. के तहत निजी क्षेत्र से 1000 अरब पये का निवेश आकर्षति करेगी

संसद में आज पेश 2008..09 के रेल बजट में रेल नेटवर्क के विस्तार. तकनीक का आधुनिकीकरण और उसके उन्नयन तथा ग्राहकों को विश्वस्तरीय सुविधायें उपलब्ध कराने के लिये अगले पांच वषो में कुल मिलाकर 2500 अरब पये का निवेश करने की योजना की घोषणा की गई है1 इसके एक बडे हिस्से का वित्तपोषण रेलवे अपने आंतरिक स्रोतों से करेगा जबकि करीब 1000 अरब पये निजी क्षेत्र से आकर्षति किये जायेंगे1 अकेले अगले वित्त वर्ष में ही पीपीपी योजनाओं के माध्यम से रेलवे परियोजनाओं में 25000 करोड पये के निवेश के ठेके दे दिये जाने की संभावना व्यक्त की गई है

रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने अपने बजट भाषण में कहा कि पीपीपी योजनाओं के तहत महानगरीय रेल स्टेशनों पर विश्वस्तरीय सुविधायें उपलब्ध कराई जायेंगी इसके अलावा बिजली और डीजल से चलने वाले रेल इंजिन तथा रेल डिब्बे बनाने की इकाई लगाने में भी निजी क्षेत्र के साथ मिलकर संयुक्त उद्यम तैयार किये जायेंगे1 श्री यादव ने कहा कि नई दिल्ली स्टेशन. मुंबई के छत्रपति शिवाजी टर्मिनल. पटना और सिकंदराबाद रेलवे स्टेशन को विश्वस्तरीय बनाने के लिये अप्रैल से शु होने वाले वित्त वर्ष में ही परियोजना का ठेका दे दिया जायेगा1 उन्होंने कहा कि इन स्टेशनों पर करीब 15000 करोड पये का निवेश होने की उम्मीद है1 इंजिन और रेल डिब्बे बनाने की इकाई लगाने में करीब 4000 करोड पये का निवेश और कंटेनर रेल. कंटेनर डिपो एवं बहुपयोगी सुविधा पार्क के निर्माण में भी करीब 2000 करोड पये का निवेश होने की संभावना है

उन्होंने कहा कि रेल भूमि विकास प्राधिकरण द्वारा रेलवे की खाली पडी जमीन के व्यावसायिक उपयोग से भी 2008..09 में करीब 4000 करोड पये का निवेश होने की संभावना है1 संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन .संप्रग. सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे माक्र्सवादी पार्टियों ने पीपीपी परियोजना को रेलवे के निजीकरण की दिशा में उठाया गया कदम बताया1 उनका कहना था कि रेल में खाली पडे स्थानों को भरने के लिये बजट में कोई कदम नहीं उठाया गया है

महाबीर मनोहर अजय मनोरंजन 1847 वार्ता.

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