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तिलहन उत्पादन पर गौर नहीं करने का नतीजा है आयात पर बढती निर्भरता

By Staff
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नयी दिल्ली 24 फरवरी.वार्ता. वर्ष 1992..93 में खाद्य तेलों की मांग को पूरा करने के मामले में लगभग आत्मनिर्भरता के द्वार पर पहुंच जाने के बाद तिलहन उत्पादन बढाने के लिए सरकार की बेखी का नतीजा है देश का खाद्य तेलों के आयात पर निर्भर हो जाना1 देश में तिलहनों का उत्पादन 1992..93 में खाद्य तेलों की घरेलू मांग को पूरा करने के करीब 260 लाख टन पर पहुंच गया था . किंतु इसके बाद तिलहनों की पैदावार बढाने के लिए कोई गंभीर प्रयास नहीं किए गए और आज स्थिति यह बन गई है कि खाद्य तेलों की लगभग आधी मांग के लिए विदेशों पर निर्भर होने की नौबत है

खाद्य तेल कारोबार से जुडे लोगों का कहना है कि पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी के खाद्य तेलों के मामले में आत्मनिर्भरता के प्रौद्योगिकी मिशन को निरंतर आगे नहीं बढाया गया और इसका नतीजा यह है कि पिछले डेढ दशक के दौरान तिलहन उत्पादन के मामले में देश की स्थिति में बहुत अधिक बदलाव नहीं आया 1 वर्ष 1980..81 के दौरान देश में मूंगफली और सरसों की पैदावार में 60 प्रतिशत का योगदान रखने वाला उत्तर प्रदेश इस मामले में निरंतर पिछडता चला गया और अब स्थिति है कि वहां सरसों का उत्पादन पहले के मुकाबले घटकर 20 प्रतिशत रह गया है और मूंगफली का तो दूर.दूर तक पता नहीं है 1 मिश्रा. जितेन्द्र.प्रभु 1113जारी वार्ता

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