न्यायाधीश को मामले के इतर टिप्पणी का अधिकार नहीं..उच्चतम न्यायालय

नई दिल्ली. 21 फरवरी .वार्ता. उच्चतम न्यायालय ने आज स्पष्ट किया कि न्यायाधीश ऐसी टिप्पणी नहीं कर सकते जो मामले में निहित विवाद से संबंध नहीं रखता हो

मुख्य न्यायाधीश के जी बालाकृष्णन. न्यायमूर्ति आर वी रवीन्द्रन और न्यायमूर्ति जे एम पांचाल की तीन सदस्यीय पीठ ने बेंगलूर में एक काल सेंटर कर्मचारी की बलात्कार के बाद हत्या के मामले में बीपीआे कंपनी के प्रबंध निदेशक और नैस्काम के अध्यक्ष सोम मित्तल की याचिका पर सुनवाई के दौरान की गई न्यायमूर्ति मार्कण्डेय काटजू की टिप्पणी को फैसले से निकाल दिया

श्री मित्तल पर अपनी कंपनी में रात्रि पाली में कार्यरत एक महिला कर्मचारी को पर्याप्त सुविधा उपलब्ध नहीं कराने का आरोप है जिसके कारण महिला की वर्ष 2005 में कंपनी की कैब में ही बलात्कार के बाद हत्या कर दी गई थी1 उन पर लापरवाही का मामला दर्ज किया गया था जिसे उन्होंने न्यायालय में चुनौती दी थी

इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति काटजू और न्यायमूर्ति और एच के सेमा की दो सदस्यीय पीठ कर रही थी1 न्यायमूर्ति काटजू ने मामले के इतर टिप्पणी करते हुए सरकार से उत्तर प्रदेश में अगि्रम जमानत के प्रावधान को बहाल करने की सिफारिश की थी जहां अदालत या पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण करने के बाद ही नियमित जमानत की मांग की जा सकती है1 न्यायमूर्ति सेमा ने न्यायमूर्ति काटजू की टिप्पणी पर असहमति व्यक्त की थी1 दो सदस्यीय पीठ में मतभेद के कारण मामले को तीन सदस्यीय पीठ को स्थानांतरित किया गया था

पीठ ने अपने फैसले में कहा कि न्यायमूर्ति काटजू द्वारा की गई टिप्पणी को फैसले से निकाला जा रहा है क्योंकि इसका पेश मामले से कोई लेना देना नहीं है

प्रकाश अजय लखमी1858प्रकाशवार्ता180

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