पुनर्विवाह के बाद भी मृत पति की संपत्ति पर हक

Supreme Court
नई दिल्ली, 20 फरवरीः उच्चतम न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि दूसरी शादी करने वाली विधवा को मृत पति की संपत्ति में हिस्से से वंचित नहीं किया जा सकता.

न्यायमूर्ति एस बी सिन्हा और न्यायमूर्ति बी एस सिरपुरकर की पीठ ने फैसले में कहा कि विधवा मृत पति की संपत्ति में अपने हिस्से की पूर्ण स्वामी बन जाती है क्योंकि 1856 के हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम पर हिंदू उत्तराधिकार कानून प्रभावी हो जाएगा.

उच्चतम न्यायालय ने चेरोट सुगाथन और अन्य कानूनी उत्तराधिकारियों द्वारा दायर अपील पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया. इस अपील में चेरोट भारती की विधवा के पक्ष में दीवानी अदालत द्वारा सुनाए गए फैसले को चुनौती दी गई थी. निचली अदालत के इस फैसले पर केरल उच्च न्यायालय ने भी अपनी मुहर लगाई थी.

सुगाथन और संपत्ति के अन्य दावेदारों ने कहा था कि भारती मृत पति की संपत्ति में हिस्सा पाने की हकदार नहीं हैं क्योंकि उन्होंने दूसरे व्यक्ति से शादी कर ली. अपने दावे के समर्थन में उन्होंने हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम 1956 का सहारा लिया. अधिनियम के अनुसार पुनर्विवाह करने की स्थिति में मृत पति की संपत्ति से विधवा के सारे अधिकार और हित समाप्त हो जाएंगे.

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