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पूरब-पश्चिम के बीच संतुलन साधे भारत:रुस

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manmohan singh-victor zubkov
नई दिल्ली, 13फरवरीः भारत और रस नेअपनी रणनीतिक भागीदारी को विस्तार देते हुए तेल और गैस की खोज के लिए सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की तथा द्विपक्षीय व्यापार 2010 तक बढ़ाकर दुगना 10 अरब डॉलर करने के लिए एक कार्य दल को संचालित करने का फैसला किया.

भारत यात्रा पर आए रुस के प्रधानमंत्री विक्टर जुबकोव और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने करीब डेढ़ घंटे चली वार्ता के बाद दोनों देशों के बीच सीमा शुल्क अपराधों की रोकथाम के लिए संयुक्त कार्यदल गठित करने के करार पर हस्ताक्षर भी किए गए. दोनों देशों ने व्यापार एवं निवेश की क्षमताओं के दोहन के लिए व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते की दिशा में आगे बढने पर भी रजामंदी जाहिर की.

डॉ. सिंह ने रुसी प्रधानमंत्री से वार्ता के बाद संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि दोनों देशों ने रक्षा, उर्जा, अंतरिक्ष, विज्ञा एवं प्रौद्योगिकी में मौजूदा सहयोग को आगे बढाने का फैसला किया तथा आपसी व्यापार में विविधता लाते हुए खनिज, आधारभूत ढांचे, परिवहन, निवेश एवं सेवाएं और उच्च प्रौद्योगिकी जैसे नए क्षेत्रों में मिल कर काम करने पर सहमति व्यक्त की.

चीन को एक अनिवार्य सहयोगी बताते हुए रूस ने आज भारत को नसीहत भीदे डालीकि बदलती हुई परिस्थितियों में उसे दुतरफा नीति अपनाते हुए पश्चिम और पूरब के बीच संतुलन साधना होगा. भारत-रूस मैत्री वर्ष 2008 के आरंभ के मौके पर रूसी संस्कृति मंत्री मिखाइल शिव्दकोई नेकहा कि भारत ने अमरीका के साथ परमाणु समझौता किया है लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि इसका फायदा रूस को नहीं होगा.

उन्होंने कहा कि पिछले डेढ़ दशक में भारत और रूस में नाटकीय परिवर्तन हुए हैं और भारत अपने संबंधों में विस्तार कर रहा है, लेकिन ऐसे में भारत को अपने हितों के हिसाब से पश्चिम और पूरब दोनों के साथ बराबरी का सरोकार रखना चाहिये.शिव्दकोई ने कहा कि मैं अगर भारत का राजनीतिक नेता होता तो मैं पश्चिम और पूरब के साथ बराबरी के रिश्ते कायम करता.

इस तरह रूसी मंत्री ने अपने देश की यह व्यथा जाहिर कर दी कि भारत का रूझान पश्चिम की ओर हो गया है. रूसी मंत्री ने कहा कि भारत-चीन और रूस मिलकर यह संतुलन साध सकते हैं. उन्होंने कहा कि इस कार्य में चीन दोनों देशों का अनिवार्य सहयोगी होगा क्योंकि रूस ही नहीं बल्कि भारत की भी लम्बी सीमा आपस में लगी है.

शिव्दकोई ने समाजवाद को ऐसी विचारधारा करार दिया जो किताबी हिसाब से तो एकदम खरी थी लेकिन जमीन पर वह व्यावहारिक साबित नहीं हुई. उन्होंने कहा कि भारत में पिछले दो दशक में आमूलचूल आर्थिक परिवर्तन आए लेकिन रूस ने तो आर्थिक के साथ वैचारिक और सामाजिक परिवर्तन भी देखे हैं और हमारा देश किस कदर बदला है इसकी कल्पना नहीं की जा सकती.

शिव्दकोई ने माना कि रूस में हुए इन परिवर्तनों की आहट भारत में नहीं हुई और बदलाव की इस आंधी में दोनों देश वैसा तारतम्य नहीं रख पाए जो उनकी दोस्ती के अनुरूप होना चाहिये था. उन्होंने कहा कि भारत और रूस बदलाव से पैदा हुई एक ही जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं और अपने घरों को दुरूस्त करने के बाद अब रिश्तों में नए हिसाब से रंग भरने की कोशिश कर रहे हैं.

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